Fisheries Export: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले का एक छोटा सा गांव अब देशभर में नई पहचान बना रहा है. यहां स्थापित देश का पहला सजावटी मछली ब्रूड बैंक मत्स्य पालन क्षेत्र में बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत शुरू की गई यह पहल अब रोजगार, मछली उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बन गई है. इस ब्रूड बैंक में सजावटी मछलियों की 25 से ज्यादा प्रजातियों का संरक्षण और प्रजनन किया जा रहा है. खास बात ये है कि यहां तैयार की गई मछलियां अब कई देशों तक पहुंच रही हैं. हाल ही में केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने इस केंद्र का दौरा कर इसकी प्रगति का जायजा लिया और मछली पालकों से बातचीत की.
25 से ज्यादा प्रजातियों का संरक्षण और प्रजनन
रायगढ़ जिले के मंगरुल गांव में स्थापित ये ब्रूड बैंक देश में अपनी तरह की पहली पहल माना जा रहा है. यहां सजावटी मछलियों की 25 से अधिक किस्मों का संरक्षण और प्रजनन किया जाता है. इस केंद्र को यशोधरा संजय खंडागले ने विकसित किया है. उनका सैम डिस्कस ब्रांड खास तौर पर उच्च गुणवत्ता वाली डिस्कस मछलियों के उत्पादन के लिए जाना जाता है. ब्रूड बैंक में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे मछलियों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है. यहां 700 से ज्यादा टैंक लगाए गए हैं, जहां अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों को तैयार किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के केंद्र आने वाले समय में मत्स्य पालन क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं.
लाखों मछलियों का उत्पादन, करोड़ों का कारोबार
यह ब्रूड बैंक सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब कमाई और रोजगार का भी बड़ा जरिया बन चुका है. अब तक यहां करीब 7.7 लाख सजावटी मछलियों का उत्पादन किया जा चुका है. इन मछलियों की बिक्री से लगभग 1.93 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है. केंद्र से 25 से 30 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है. यहां कई युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे भी आधुनिक तरीके से मछली पालन शुरू कर सकें. मत्स्य पालन विशेषज्ञों के अनुसार, सजावटी मछलियों की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए यह क्षेत्र युवाओं के लिए अच्छा व्यवसाय बन सकता है.
विदेशों तक पहुंच रही भारतीय सजावटी मछलियां
मंगरुल का यह ब्रूड बैंक अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है. यहां तैयार की गई सजावटी मछलियों का निर्यात अमेरिका, इटली, फ्रांस, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया, कतर, कुवैत, मलेशिया, चीन, उज्बेकिस्तान, नाइजीरिया और इज़राइल जैसे देशों में किया जा रहा है. यह भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र की बढ़ती ताकत को दिखाता है. अधिकारियों के अनुसार, भारत में लगभग 700 मीठे पानी और 300 से ज्यादा समुद्री प्रजातियां पाई जाती हैं. देश में सजावटी मछलियों के निर्यात का मूल्य अब करीब 41 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. सरकार इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है.
मत्स्य पालन से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि इस तरह की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और लोगों की आय मजबूत होगी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अब तक 1,986 बैकयार्ड इकाइयां, 6,018 फिश कियोस्क और एक्वेरियम, 117 खुदरा बाजार, 5 ब्रूड बैंक और 199 एकीकृत सजावटी मछली इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं. महाराष्ट्र की 877.97 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 173 मछली लैंडिंग केंद्र और 526 मत्स्य ग्राम इस क्षेत्र को मजबूत आधार देते हैं. राज्य में 15 लाख से ज्यादा लोग मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं. सरकार का मानना है कि अगर योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए और आधुनिक तकनीक गांवों तक पहुंचाई जाए, तो भारत मत्स्य पालन और सजावटी मछली निर्यात के क्षेत्र में दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो सकता है.