Summer Fish Care: गर्मी का मौसम इंसानों के साथ-साथ मछलियों के लिए भी बड़ी परेशानी लेकर आता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से तालाब का पानी गर्म हो जाता है, जिससे मछलियों की ग्रोथ रुक सकती है. कई बार पानी में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और मछलियां बीमार भी पड़ जाती हैं. ऐसे में मछली पालकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के अनुसार अगर तालाब के पानी और मछलियों के खानपान का सही तरीके से ध्यान रखा जाए, तो गर्मियों में भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. कुछ आसान उपाय अपनाकर मछली पालक इस मौसम में भी बेहतर ग्रोथ और करोड़ों का मुनाफा कमा सकते हैं.
गर्मी में क्यों रुक जाती है मछलियों की ग्रोथ
गर्मियों में तालाब का पानी तेजी से गर्म हो जाता है. जब पानी का तापमान बढ़ता है, तो उसमें ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. ऑक्सीजन कम होने पर मछलियां तनाव में आ जाती हैं और उनका विकास धीमा पड़ जाता है. विभाग के अनुसार मछलियां पानी की अलग-अलग परतों में रहती हैं. गर्मी बढ़ने पर ऊपर का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है, इसलिए मछलियां नीचे की तरफ चली जाती हैं. इससे नीचे की परतों में दबाव बढ़ता है और मछलियों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है. अगर समय रहते पानी का सही प्रबंधन न किया जाए, तो मछलियों में बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है. यही कारण है कि गर्मियों में तालाब की नियमित निगरानी बहुत जरूरी मानी जाती है.
ठंडा पानी और एरेयटर का इस्तेमाल जरूरी
मत्स्य विभाग के अनुसार गर्मियों में तालाब का तापमान नियंत्रित रखना सबसे जरूरी काम है. इसके लिए सुबह और शाम के समय कुछ घंटों तक ट्यूबवेल चलाकर तालाब में ताजा और ठंडा पानी छोड़ना चाहिए. ठंडा पानी मिलने से तालाब का तापमान संतुलित रहता है और मछलियों को राहत मिलती है. इससे उनकी ग्रोथ बेहतर होती है और बीमारी का खतरा भी कम हो जाता है. इसके अलावा तालाब में एरेयटर का इस्तेमाल भी काफी फायदेमंद माना जाता है. एरेयटर पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखने में मदद करता है. जब पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन रहती है, तो मछलियां स्वस्थ रहती हैं और तेजी से बढ़ती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर मछलियां सुस्त पड़ जाती हैं और उनका वजन बढ़ना रुक सकता है. इसलिए गर्मियों में ऑक्सीजन का सही स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है.
चूना और नमक से पानी रहेगा साफ
गर्मी के मौसम में तालाब के पानी को साफ और बैक्टीरिया मुक्त रखना भी जरूरी होता है. इसके लिए विभाग ने तालाब में चूना और नमक के इस्तेमाल की सलाह दी है. मत्स्य विभाग के अनुसार प्रति हेक्टेयर करीब 250 किलो चूना डालने से पानी में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम होती है. इससे पानी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और मछलियों को फायदा मिलता है. इसके साथ ही समय-समय पर तालाब में नमक का छिड़काव भी करना चाहिए. नमक पानी में हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है. इससे मछलियां संक्रमण और कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहती हैं. मछली पालकों को ध्यान रखना चाहिए कि तालाब का पानी ज्यादा गंदा या बदबूदार न हो. साफ पानी मछलियों की अच्छी ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी माना जाता है.
दवाइयों का इस्तेमाल सोच-समझकर करें
गर्मियों में मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए बाजार में कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं. लेकिन विभाग का कहना है कि बिना जानकारी के किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. गलत मात्रा में दवा डालने से मछलियों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ या मत्स्य विभाग से सलाह लेना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मछली पालक गर्मियों में सही खानपान, साफ पानी, ऑक्सीजन और नियमित देखभाल पर ध्यान दें, तो इस मौसम में भी शानदार उत्पादन लिया जा सकता है. गर्मी के दिनों में थोड़ी सावधानी और सही प्रबंधन से मछली पालन का कारोबार नुकसान की जगह अच्छा मुनाफा दे सकता है. यही वजह है कि विभाग लगातार मछली पालकों को जागरूक करने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दे रहा है.