नेपाल बाढ़ : इंसानों के बाद अब पशुधन-पोल्ट्री पर टूटा पहाड़, 1.20 लाख से ज्यादा मुर्गियां मरीं

नेपाल में भोटे कोशी की विनाशकारी बाढ़ ने इंसानों के साथ पशुधन क्षेत्र को भी गहरा झटका दिया. नुवाकोट में 1,278 गाय-भैंस, 2,000 बकरियां और 1,20,913 मुर्गियां मारी गईं. पोल्ट्री, मछली और पशुपालन कारोबार तबाह होने से किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 4 Sep, 2026 | 02:07 PM

नेपाल के रसुवा जिले के भोटे कोशी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने इंसानी जनजीवन के साथ पशुधन और पोल्ट्री क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. समाचार वेबसाईट रतोपाटी के अनुसार, अब तक 1,000 से अधिक लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं. पशुधन क्षेत्र में नुकसान का अंतिम आकलन अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती आंकड़े बड़े पैमाने पर तबाही की तस्वीर पेश करते हैं.

नुवाकोट में 1,278 गाय-भैंस और 1.20 लाख से ज्यादा मुर्गियां मरीं

पशुधन सेवा विभाग  की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, नुवाकोट में 1,278 गाय-भैंस, 2,000 बकरियां, 120,913 मुर्गियां और 1,500 सूअर बाढ़ में मारे गए हैं. त्रिशुली स्थित सरकारी मछली फार्म भी बाढ़ में बह गया. यहां 100 तालाबों की 26,589 मछलियां और अनुसंधान के लिए रखी गई 688 किलोग्राम मछलियां नष्ट हो गईं. इसके अलावा 10,000 मुर्गियों की क्षमता वाला एक पोल्ट्री फार्म और 200 से अधिक सूअरों वाला निजी फार्म भी पूरी तरह बह गया. नुवाकोट में त्रिवेणी एग्रो वेट, किसान औषधि पसल, देवीघाट के 25 फार्म समेत कई निजी पशु एवं पोल्ट्री प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हुआ.

धाडिंग में भी सैकड़ों पशु और हजारों मुर्गियां प्रभावित

धाडिंग जिले के बेनिघाट रोरांग में 22 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त  हुई हैं. पूरे जिले में 47 गाय-भैंस, 70 बकरियां, 3,626 मुर्गियां और 83 सूअर मारे गए हैं. वहीं गोरखा, चितवन और नवलपरासी पूर्व से नुकसान का पूरा आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है. नारायणी नदी में बहकर आए मृत पशुओं के शवों का निपटारा भी किया जा रहा है. चितवन में अब तक 3 भैंस, 3 सूअर और 1 कुत्ते के शव, जबकि नवलपरासी पूर्व में 1 बकरी, 3 सूअर और 1 कुत्ते के शव का सुरक्षित निपटान किया गया है.

50 पशु चिकित्सक और तकनीशियन राहत कार्य में जुटे

बाढ़ के बाद पशुधन सेवा विभाग और नेपाल पशु चिकित्सा संघ  ने मृत पशुओं की खोज, उपचार और संभावित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए तकनीकी टीमें तैनात की हैं. नेपाल पशु चिकित्सा संघ के अनुसार करीब 50 पशु चिकित्सक और तकनीशियन सीधे राहत एवं प्रबंधन कार्य में लगे हैं. रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी सहित प्रभावित जिलों में टीमें काम कर रही हैं. जीवित पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए फुट एंड माउथ डिजीज, लेप्टोस्पाइरोसिस, एंथ्रेक्स और रेबीज के टीके भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गए हैं.

मृत पशुओं को कम से कम 3 फीट गहरा दफनाने का निर्देश

पशुधन सेवा विभाग ने मृत पशुओं के सुरक्षित  निपटान के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं. विभाग के मुताबिक शवों को कम से कम 3 फीट मिट्टी से ढककर दफनाया जाना चाहिए. दफन स्थल पेयजल स्रोतों, बस्तियों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों से दूर होना चाहिए. शव प्रबंधन में लगे लोगों के लिए रबर के जूते, एप्रन, डिस्पोजेबल दस्ताने, मास्क और चश्मे जैसे सुरक्षा उपकरण जरूरी बताए गए हैं. गड्ढे में शव रखने के बाद नमक और चूना डालकर पर्याप्त मिट्टी से ढकने तथा ऊपर अतिरिक्त मिट्टी का टीला बनाने की सलाह दी गई है. बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा में परिवहन बाधित होने के कारण दूध, तैयार मुर्गियों और पशु आहार की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. इससे किसानों को पशुधन के नुकसान के साथ-साथ चारे और बाजार तक उत्पाद पहुंचाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़