गाभिन भैंस की सही देखभाल से मिलेगा ज्यादा दूध और स्वस्थ बछड़ा, बस पशुपालक अपनाएं ये टिप्स

गर्भवती भैंस पशुपालकों की सबसे कीमती संपत्ति होती है. सही समय पर सही देखभाल से स्वस्थ बछड़ा पैदा होता है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है. पशुपालन विभाग के अनुसार गर्भकाल, प्रसव और प्रसव के बाद की देखभाल बेहद जरूरी है, जिससे भैंस स्वस्थ रहती है और पशुपालकों को अच्छा फायदा मिलता है.

नोएडा | Updated On: 28 Feb, 2026 | 04:53 PM

Buffalo Care: गांवों में भैंस पशुपालकों की सबसे बड़ी पूंजी होती है, खासकर गर्भवती भैंस. अगर इस समय सही देखभाल की जाए तो स्वस्थ बछड़ा पैदा होता है और भैंस ज्यादा दूध देती है. हरियाणा पशुपालन विभाग के अनुसार, थोड़ी सी लापरवाही से नुकसान भी हो सकता है. इसलिए गाभिन भैंस की सही देखभाल हर पशुपालक के लिए जरूरी है.

गर्भवती भैंस क्यों होती है खास

हरियाणा की मुर्राह जैसी अच्छी नस्ल की भैंसें पशुपालकों  के लिए कमाई का बड़ा साधन हैं. हरियाणा पशुपालन विभाग के अनुसार, अगर भैंस को सही आहार और खनिज लवण मिलते रहें तो वह समय पर गर्भधारण करती है और स्वस्थ रहती है. भैंस का गर्भकाल करीब 10 महीने का होता है. आखिरी तीन महीने सबसे ज्यादा जरूरी होते हैं क्योंकि इसी समय भैंस और बच्चे  दोनों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. इस समय अगर सही ध्यान रखा जाए तो कठिन प्रसव, कैल्शियम की कमी, जेर रुकना और थन की बीमारी जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है.

गर्भकाल में ऐसे रखें भैंस का ध्यान

हरियाणा पशुपालन विभाग के अनुसार, गर्भवती भैंस  को हमेशा संतुलित आहार देना चाहिए. हरा चारा, भूसा और दाना सही मात्रा में होना चाहिए. कैल्शियम और फास्फोरस जैसे खनिज तत्व जरूर देने चाहिए ताकि भैंस मजबूत रहे. भैंस को हमेशा साफ और ताजा पानी पिलाना चाहिए. गर्मी के मौसम में दिन में 2-3 बार नहलाना अच्छा रहता है और धूप से बचाना चाहिए. गर्भवती भैंस को ज्यादा दौड़ाना या दूर तक चलाना नहीं चाहिए. जिस जगह भैंस बांधी जाती है वहां फर्श फिसलन वाला नहीं होना चाहिए. बैठने की जगह नरम और साफ होनी चाहिए ताकि भैंस को चोट न लगे. गर्भवती भैंस को दूसरे पशुओं से लड़ने नहीं देना चाहिए. ब्याने से करीब दो महीने पहले दूध निकालना बंद  कर देना चाहिए ताकि भैंस को आराम मिल सके.

प्रसव से पहले दिखते हैं ये संकेत

भैंस के ब्याने से पहले कुछ खास संकेत दिखाई देते हैं. भैंस सुस्त  हो जाती है और दूसरे पशुओं से अलग रहने लगती है. वह कम खाना शुरू कर देती है. ब्याने से 2-3 दिन पहले थन फूल जाते हैं और योनि में सूजन दिखाई देती है. कई बार योनि से चिपचिपा द्रव्य निकलता है. कूल्हे के पास गड्ढा जैसा दिखने लगता है. ऐसे संकेत दिखते ही पशुपालक को सतर्क हो जाना चाहिए और भैंस पर ध्यान देना चाहिए.

प्रसव के समय रखें खास सावधानी

जब भैंस ब्याने वाली हो तो उसे दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए. जगह साफ, हवादार और सूखी होनी चाहिए. ब्याने के समय ज्यादा शोर नहीं करना चाहिए और अनजान लोगों को पास नहीं जाने देना चाहिए. अगर पानी की थैली दिखने के बाद एक घंटे तक बच्चा बाहर नहीं आता तो तुरंत पशु डॉक्टर को बुलाना चाहिए. बछड़ा पैदा  होने के बाद उसे भैंस को चाटने देना चाहिए. इससे बछड़ा जल्दी सूख जाता है और मजबूत बनता है. आमतौर पर 6 से 8 घंटे में जेर गिर जाती है. जेर गिरने के बाद उसे जमीन में दबा देना चाहिए ताकि भैंस उसे न खा सके.

प्रसव के बाद भी जरूरी है गाय-भैंस की देखभाल

भैंस के ब्याने के बाद उसकी सफाई बहुत जरूरी होती है. गुनगुने पानी से पिछला हिस्सा साफ करना चाहिए. भैंस को गुड़ और नमक मिला गर्म पानी  देना फायदेमंद रहता है. इससे भैंस को ताकत मिलती है. इस समय गर्भाशय बाहर आना, जेर रुकना और थनैला जैसी बीमारियों का खतरा रहता है. अगर भैंस ठीक से खाना न खाए या कमजोर लगे तो तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाना चाहिए. अगर प्रसव के बाद सही देखभाल की जाए तो भैंस जल्दी ठीक हो जाती है और ज्यादा दूध देती है. सही देखभाल से पशुपालकों की कमाई भी बढ़ती है.

Published: 28 Feb, 2026 | 05:30 PM

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