महंगी दवाइयां छोड़ें! घर के मसालों से बनाएं ये जादुई चूर्ण, गाय-भैंस के दूध में होगी रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी
आज के दौर में पशुपालक गाय-भैंस के कम दूध देने से परेशान रहते हैं और महंगी दवाइयों पर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन अब आपकी रसोई में छिपे मेथी, अजवाइन और हल्दी जैसे मसालों से तैयार देसी चूर्ण पशुओं का दूध बढ़ाने और उनका पाचन सुधारने में चमत्कारिक असर दिखा रहा है. कम खर्च वाला यह फॉर्मूला किसानों के लिए बड़ी राहत लाया है.
Milk Production : पशुपालन की दुनिया में एक पुरानी कहावत है-जैसा होगा आहार, वैसा ही मिलेगी दूध की धार. लेकिन आज के समय में जब महंगाई आसमान छू रही है, तब पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कम खर्च में अपने पशुओं से बेहतर उत्पादन कैसे लें. कई बार अच्छी खुराक के बाद भी गाय-भैंस उतना दूध नहीं देतीं, जितनी उनसे उम्मीद की जाती है. ऐसे में पशुपालक अक्सर बाजार की महंगी दवाइयों और सप्लीमेंट्स के जाल में फंस जाते हैं, जिससे फायदा कम और जेब ज्यादा ढीली होती है. लेकिन आपकी इस बड़ी चिंता का समाधान अब आपके घर की रसोई में ही छिपा है. एक ऐसा देसी मसालेदार चूर्ण जो इन दिनों गांवों से लेकर शहरों तक चर्चा का विषय बना हुआ है, आपके पशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
घर के मसालों से तैयार सफेद सोना बढ़ाने का फॉर्मूला
अक्सर पशुओं का दूध कम होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी पाचन शक्ति का कमजोर होना होता है. जब पशु का हाजमा खराब होता है, तो वह जो कुछ भी खाता है, उसका पूरा पोषण उसके खून और दूध में नहीं बदल पाता. इस समस्या को दूर करने के लिए हमारे पारंपरिक मसालों का यह मिश्रण बेहद कारगर है. इसे बनाने के लिए आपको चाहिए:
मेथी- 100 ग्राम (मेटाबॉलिज्म के लिए)
अजवाइन- 50 ग्राम (गैस से राहत के लिए)
सौंफ- 50 ग्राम (ठंडक और बेहतर पाचन के लिए)
हल्दी- 20 ग्राम (रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए)
हींग- 5 ग्राम (पेट साफ रखने के लिए)
इन सबको पीसकर बनाया गया यह पाउडर न केवल दूध बढ़ाता है, बल्कि इसे पशुओं का सुरक्षा कवच भी कहा जा सकता है.
आखिर यह चूर्ण काम कैसे करता है? इसके पीछे का विज्ञान
इस नुस्खे में शामिल हर सामग्री का अपना एक खास महत्व है. मेथी पशु के शरीर में दूध बनाने वाले हॉर्मोन्स को सक्रिय करती है. अजवाइन और सौंफ यह सुनिश्चित करते हैं कि पशु को कभी पेट दर्द या ‘अफरा’ (गैस) की समस्या न हो. हल्दी एक नेचुरल एंटीसेप्टिक है, जो पशु के शरीर के अंदरूनी घावों को भरती है और थनेला जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव करती है. वहीं, हींग की हल्की सी मात्रा पशु की भूख को खोल देती है, जिससे वह चारा चाव से खाता है. जब पशु स्वस्थ और खुश रहता है, तो उसका असर सीधे दूध की बाल्टी में नजर आता है.
बस एक चम्मच और जादू शुरू
इस चूर्ण को इस्तेमाल करना बेहद आसान है. इसके लिए आपको किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है. रोजाना सुबह और शाम, पशु के नियमित चारे या दाने (बांटे) में सिर्फ 50 ग्राम यह चूर्ण मिला दें. पशुपालकों के अनुभव बताते हैं कि इसे लगातार एक हफ्ते तक देने से दूध उत्पादन में संतोषजनक बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है. यह चूर्ण देने के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि पशु को साफ और ताजा पानी मिलता रहे, क्योंकि बेहतर पाचन के लिए पानी की भूमिका अहम होती है.
सिर्फ दवा नहीं, प्यार और सही खुराक भी है जरूरी
पशु विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी नुस्खा तभी पूरी तरह काम करता है जब पशु को तनावमुक्त माहौल और संतुलित आहार मिले. याद रखें, एक गाय को उसके हर 4 लीटर दूध पर और भैंस को उसके हर 3 लीटर दूध पर कम से कम 1 किलो अतिरिक्त पशु आहार की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही हरा चारा, खली, चोकर और थोड़ा सा गुड़ पशु की ऊर्जा बनाए रखता है. यह देसी चूर्ण आपके पशु को वह एक्स्ट्रा बूस्ट देता है जो उसे बीमारियों से लड़ने और ज्यादा दूध देने के काबिल बनाता है. कम लागत का यह उपाय आज के समय में किसानों के लिए मुनाफे की नई चाबी साबित हो रहा है.