सर्दियों में पशुओं के दूध घटने की टेंशन खत्म, बस खिलाएं ये जादुई प्रोटीन डाइट और फिर देखें कमाल!
सर्दियों के मौसम में अक्सर पशुओं का दूध कम हो जाता है, जिससे पशुपालकों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है. लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है. सही खान-पान और खास प्रोटीन डाइट के जरिए आप न केवल पशुओं को सेहतमंद रख सकते हैं, बल्कि दूध उत्पादन भी बढ़ा सकते हैं. जानिए कैसे मामूली बदलाव लाएंगे बड़ा मुनाफा.
Milk Production : सर्दियों का मौसम आते ही पशुपालकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगती हैं. कड़ाके की ठंड और पाले की वजह से जहां एक ओर चारा सूख जाता है, वहीं दूसरी ओर पशुओं का दूध उत्पादन भी गिरने लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर हम अपनी रसोई और खेती के कुछ देसी नुस्खों को अपनाएं, तो ठंड के मौसम में भी आपकी गाय और भैंस दूध की नदियां बहा सकती हैं?
जी हां, सर्दियों में पशुओं को सिर्फ पेट भरने के लिए चारा नहीं, बल्कि शरीर को गर्म रखने और ऊर्जा देने वाले स्पेशल डाइट की जरूरत होती है. आइए जानते हैं वो तरीके जिससे पशु रहेंगे तंदुरुस्त और आपका दूध का बाल्टी कभी खाली नहीं रहेगी.
ऊर्जा का पावर हाउस- दलिए का जादू
सर्दियों में पशु के शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए एक्स्ट्रा एनर्जी की जरूरत होती है. जैसे हमें ठंड में गरमा-गरम हलवा या लड्डू पसंद आते हैं, वैसे ही पशुओं के लिए गेहूं, मक्का, बाजरा और ज्वार का दलिया रामबाण है. बाजरा तासीर में गर्म होता है, जो पशु को अंदर से गर्माहट देता है. इसके साथ ही चोकर और राइस पॉलिश को डाइट में शामिल करें. यह न केवल पशु का पेट भरते हैं, बल्कि उसे वह ताकत देते हैं जिससे दूध की मात्रा स्थिर बनी रहती है.
खली का मेल, दूध का खेल
अगर आप चाहते हैं कि दूध में फैट (मलाई) भरपूर हो, तो प्रोटीन पर ध्यान देना जरूरी है. इसके लिए सरसों, मूंगफली, बिनौला या अलसी की खल सबसे बेहतरीन विकल्प हैं. अलसी की खल खिलाने से पशु की त्वचा में चमक आती है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इन खलों को भिगोकर खिलाने से पशु इन्हें चाव से खाता है और उसे भरपूर प्रोटीन मिलता है, जो सीधे तौर पर दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है.
हड्डियों की मजबूती और मिनरल मिक्चर
अक्सर हम सिर्फ चारा और दाना खिलाकर सोचते हैं कि काम पूरा हो गया, लेकिन खनिज मिश्रण (Mineral Mixture) की कमी पशु को अंदर से कमजोर कर देती है. सर्दियों में कैल्शियम , फास्फोरस और जिंक जैसे तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है. बाजार से मिलने वाले अच्छी गुणवत्ता के मिनरल मिक्चर को रोजाना 50 से 60 ग्राम दाने में मिलाकर दें. यह छोटे से बदलाव से पशु बार-बार बीमार नहीं पड़ेगा और उसकी प्रजनन क्षमता भी बनी रहेगी.
पानी पिलाने का सही तरीका और रखरखाव
ठंड के दिनों में पशु पानी कम पीते हैं, जिससे उनका पाचन बिगड़ जाता है और दूध कम हो जाता है. याद रखें, दूध में 80 फीसदी से ज्यादा पानी होता है. इसलिए पशु को कभी भी बहुत ठंडा या बासी पानी न पिलाएं. कोशिश करें कि उन्हें ताजा या हल्का गुनगुना पानी ही दें. इसके अलावा, रात के समय पशुओं के नीचे पुआल बिछाएं और उन्हें सीधी ठंडी हवा से बचाएं. याद रखें, पशु जितना आराम से रहेगा, उतना ही खुश होकर दूध देगा. सर्दियों का यह समय आपके पशुओं की देखभाल का इम्तिहान है. थोड़ा सा प्यार और सही खान-पान उन्हें बीमारियों से दूर रखेगा और आपकी आमदनी में चार चांद लगा देगा.