Green Fodder : गांवों में पशुपालन आज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि कमाई का मजबूत जरिया बन चुका है. लेकिन पशुपालकों की सबसे बड़ी परेशानी होती है- सस्ता, पौष्टिक और पूरे साल मिलने वाला चारा. रोज-रोज चारा खरीदना या उगाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. ऐसे में अगर एक बार घास लगाकर कई साल तक हरा चारा मिलता रहे, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ खास तरह की हरी घास ऐसी हैं, जिन्हें पशु बड़े चाव से खाते हैं, सेहत भी अच्छी रहती है और दूध उत्पादन में भी साफ फर्क दिखता है.
दो महीने में तैयार होने वाली नेपियर घास
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेपियर घास पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि बुवाई के करीब दो महीने बाद ही यह कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इस घास में प्रोटीन और जरूरी विटामिन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे पशुओं की ताकत बढ़ती है. दुधारू पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं और लगातार इसका सेवन करने से उनकी सेहत में सुधार देखने को मिलता है. यही वजह है कि इसे पशुओं का उत्तम आहार माना जाता है.
एक बार बोने पर 4-5 साल तक फायदा
नेपियर घास की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसे बार-बार बोने की जरूरत नहीं पड़ती. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बार सही तरीके से लगाने के बाद इस घास से 4 से 5 साल तक चारा लिया जा सकता है. इससे पशुपालकों का समय, मेहनत और पैसा तीनों बचते हैं. नियमित कटाई करने पर यह घास फिर से तेजी से बढ़ती है. दुधारू पशुओं को यह घास खिलाने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है.
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ज्वार का चारा रखता है शरीर में नमी
पशुओं के चारे में ज्वार का भी खास महत्व है. हरे ज्वार को खिलाने से पशुओं के शरीर में पानी की कमी नहीं होती. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन के लिए फायदेमंद होता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ज्वार का हरा और ताजा चारा देने से दूध उत्पादन में सुधार देखा गया है. हालांकि, ध्यान रखने वाली बात यह है कि ज्वार ज्यादा सूखा या खराब न हो. हरा-भरा और सही नमी वाला ज्वार ही पशुओं को देना चाहिए.
बरसीम: जिसे पशु रसगुल्ले की तरह खाते हैं
बरसीम घास सर्दियों में उगाई जाने वाली सबसे पसंदीदा हरी चारा फसल मानी जाती है. पशु इसे बेहद चाव से खाते हैं, इसी वजह से किसान इसे मजाक में रसगुल्ले जैसी घास भी कहते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरसीम में प्रोटीन की मात्रा 20 से 21 फीसदी तक होती है, जो पशुओं की सेहत के लिए बहुत जरूरी है. सर्दियों में इसकी खेती कर हर 35 से 40 दिन में कटाई की जा सकती है. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध देने की क्षमता बनी रहती है.