National Gokul Mission: भारत में डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल ने बड़ी सफलता हासिल की है. संस्थान के वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination-AI) आधारित नस्ल सुधार मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तकनीक से पशुपालकों को कम लागत में बेहतर नस्ल के पशु मिलेंगे, दूध उत्पादन बढ़ेगा और डेयरी व्यवसाय अधिक लाभदायक बनेगा.
100 गांवों में चला विशेष अभियान, हजारों पशुओं पर हुआ AI
मीडिया रिपोर्ट के अनुससार, ICAR-NDRI के वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के 100 गांवों को अपनाकर वर्ष 2022 में नस्ल सुधार परियोजना शुरू की. इस अभियान के तहत संस्थान के उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के सीमेन का उपयोग करते हुए 39,803 गायों और भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया. इनमें से 16,200 पशु गर्भवती हुए और अधिकांश ने स्वस्थ बछड़ों को जन्म भी दे दिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इन पशुओं की नस्ल पहले की तुलना में बेहतर है और भविष्य में इनसे अधिक दूध उत्पादन की उम्मीद है.
बेहतर नस्ल, तेज विकास और कम लागत में ज्यादा फायदा
संस्थान के अनुसार, इस मॉडल से पैदा होने वाले पशु तेजी से बढ़ते हैं और कम उम्र में परिपक्व हो जाते हैं. इससे पशुपालकों को कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाले पशु मिलते हैं. बेहतर नस्ल के कारण दूध उत्पादन क्षमता बढ़ती है, जिससे डेयरी व्यवसाय की आय में भी बढ़ोतरी होती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश के डेयरी सेक्टर को भी नई मजबूती दे सकती है.
25 प्रशिक्षित कर्मियों ने गांव-गांव पहुंचकर किया काम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ICAR-NDRI के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार, ये परियोजना राष्ट्रीय गोकुल मिशन से मिले वित्तीय सहयोग के तहत चलाई गई. मुजफ्फरनगर के लालूखेड़ी गांव स्थित किसान सेवा केंद्र के माध्यम से 25 प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान कर्मियों ने 100 गांवों में घर-घर जाकर पशुपालकों को जागरूक किया और सेवाएं उपलब्ध कराईं. इस पूरी परियोजना पर लगभग 3.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए. किसानों के सहयोग से अभियान सफल रहा और अब बेहतर नस्ल के पशु अच्छे परिणाम दे रहे हैं.
पूरे देश में अपनाया जा सकता है ये मॉडल
ICAR-NDRI का मानना है कि ये मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है. यदि राज्य सरकारें अपने स्तर पर इसे अपनाती हैं, तो नस्ल सुधार कार्यक्रमों को गति मिलेगी, दूध उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर इस मॉडल को लागू करने से पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारत को डेयरी उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है. यही कारण है कि ICAR इस मॉडल को देशभर में विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है.