जब गाय ने बंद किया दूध, तो पुराने जमाने की इस तकनीक ने कर दिया कमाल, पढ़ें खबर

ग्रामीण भारत में आज भी पशुपालन से जुड़े अद्भुत देसी नुस्खे प्रचलित हैं. जब किसी गाय का बछड़ा मर जाता है, तो किसान इस चीज बछड़ा बनाकर गाय की ममता को जगाते हैं. यह मनोवैज्ञानिक तरीका न केवल पशु का तनाव कम करता है, बल्कि बिना किसी हानिकारक इंजेक्शन के दूध की धार भी वापस ले आता है.

नोएडा | Updated On: 19 Jan, 2026 | 06:53 PM

Artificial Calf Method : ग्रामीण भारत की मिट्टी में ऐसे कई हुनर दबे हुए हैं, जो किसी आधुनिक लैब से कम नहीं हैं. कल्पना कीजिए एक किसान के घर की, जहां गाय ने बच्चा तो दिया लेकिन वह जी न सका. घर में मातम जैसा माहौल है-एक तरफ बेजुबान बच्चे की मौत का गम और दूसरी तरफ यह चिंता कि अब गाय दूध कैसे देगी? अक्सर ऐसी स्थिति में गाय तनाव में आ जाती है और उसका दूध चढ़ जाता है.

लेकिन हमारे पूर्वजों ने इस समस्या का एक ऐसा जादुई और देसी समाधान निकाला था, जो आज भी विज्ञान को हैरान कर देता है. इसे कहते हैं आर्टिफिशियल बछड़ा या स्थानीय भाषा में कैती. यह सिर्फ एक पुतला नहीं, बल्कि मां की ममता को जगाने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका है.

क्या है कैती या भूसे का बछड़ा? सदियों पुराना विज्ञान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब गाय का बछड़ा  मर जाता है, तो वह उसे चाटने और दूध पिलाने के लिए तड़पती है. अगर उसे बच्चा न मिले, तो उसके शरीर में ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) नाम का हार्मोन नहीं बनता, जो दूध उतारने के लिए जिम्मेदार होता है. पुराने जमाने में किसान क्या करते थे? वे मृत बछड़े की खाल में भूसा और लकड़ी भरकर बिल्कुल असली जैसा दिखने वाला ढांचा तैयार करते थे. इसे गाय के सामने रखा जाता था. गाय उसे सूंघती, चाटती और यह मान लेती कि उसका बच्चा जीवित है. इसी अहसास के साथ उसका दूध उतरने लगता. आज भी गांवों में लकड़ी और कपड़े से ऐसा ढांचा बनाया जाता है, जो संकट के समय किसान का सहारा बनता है.

दूध उतारने का हार्मोनल खेल- डॉक्टर क्या कहते हैं?

पशु चिकित्सकों का मानना है कि पशुओं में ममता का अहसास बहुत गहरा होता है. अगर बच्चा पेट में ही मर जाए या जन्म के तुरंत बाद उसकी मौत हो जाए, तो गाय का शरीर दूध देने के लिए तैयार नहीं होता. बघेलखंड और अन्य ग्रामीण अंचलों में इसे पेन्हाना कहते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, अगर किसी दूसरे बछड़े को मृत बच्चे के अवशेषों (फ्लूड) से सानकर गाय के पास लाया जाए, तो भी गाय उसे अपना मान लेती है. यह सब कुछ उस गंध और स्पर्श का कमाल है, जो गाय के मस्तिष्क  को संदेश भेजता है कि ममता का फर्ज निभाओ और दूध उतारो.

आर्टिफिशियल बछड़ा बनाने की सही तकनीक और सावधानी

इस देसी नुस्खे में समय का बहुत महत्व है. जैसे ही पता चले कि बछड़ा नहीं रहा, बिना देर किए आर्टिफिशियल बछड़ा तैयार कर गाय के सामने रख देना चाहिए. पुराने लोग बताते हैं कि इस पुतले को इस तरह बनाया जाता था कि वह दिखने में हुबहू बछड़ा लगे. आज के दौर में किसान लकड़ी के ढांचे पर पुराने कपड़े लपेटकर और उसे मृत बच्चे की गंध देकर तैयार करते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि बच्चा पेट में ही मर गया हो और गाय को दर्द हो रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर को बुलाना चाहिए. जब बच्चा बाहर निकल जाए, तभी यह देसी उपाय  कारगर होता है.

परंपरा और जरूरत का मेल: आज भी क्यों है यह जरूरी?

आजकल बाजार में दूध उतारने के लिए इंजेक्शन (Oxytocin) का इस्तेमाल किया जाता है, जो पशु के स्वास्थ्य  और दूध पीने वाले इंसानों के लिए भी खतरनाक है. ऐसे में यह आर्टिफिशियल बछड़ा वाला देसी नुस्खा सबसे सुरक्षित और मानवीय तरीका है. यह न केवल पशु के मानसिक तनाव को कम करता है, बल्कि किसान को आर्थिक नुकसान से भी बचाता है. यह तरीका हमें सिखाता है कि पशुपालन सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि बेजुबान की भावनाओं को समझना भी है. जब गाय उस पुतले को चाटती है, तो वह दृश्य भले ही नकली हो, लेकिन उससे बहने वाली ममता की धार बिल्कुल असली होती है.

Published: 19 Jan, 2026 | 07:45 PM

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