हर पंचायत में डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटी बनेंगी, दूध की समय पर खरीद और भुगतान पक्का होगा

हिमाचल के शिमला जिले में हर पंचायत में डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटी बनाई जा रही है. इससे पशुपालकों को समय पर दूध बिक्री और भुगतान की सुविधा मिलेगी. यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी उद्योग को मजबूती देगा.

नोएडा | Published: 31 Aug, 2025 | 03:18 PM

हिमाचल प्रदेश प्रदेश में पशुपालकों की कमाई बढ़ाने और दूध उत्पादन को लेकर तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं. इसी का हिस्सा है राज्यवार जिलों में डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी का गठन करना है. इस क्रम में शिमला जिले में पंचायत स्तर पर डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटी बनाई जा रही हैं. इससे गांव के पशुपालकों को न सिर्फ दूध बेचने की पक्की सुविधा मिलेगी, बल्कि समय पर भुगतान भी सुनिश्चित होगा. यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. बता दें कि दिनों 221 किसानों का दूध चिलिंग प्लांट में कर्मचारियों की लापरवाही से खराब हो गया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सख्ती बढ़ाने और पशुपालकों, दूध किसानों को राहत देने के साथ योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने के निर्देश दिए थे.

57 पंचायतों में होगा डेयरी सोसाइटी का गठन

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने जानकारी दी कि प्रथम चरण में जिले की 57 ग्राम पंचायतों को इस योजना में शामिल किया गया है. इनमें से 8 पंचायतों में पहले ही डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी का गठन पूरा कर लिया गया है. उपायुक्त जिला स्तरीय डेयरी विकास समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोले कि यह पहल पशुपालकों को एक स्थायी आमदनी का जरिया देने के लिए की जा रही है.

हर पंचायत में सिर्फ एक सोसाइटी होगी

सरकार की योजना के अनुसार, हर पंचायत में केवल एक ही डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी बनाई जाएगी. इसमें न्यूनतम 11 सदस्य होने अनिवार्य होंगे. साथ ही, हिमाचल मिल्क फेडरेशन की ओर से बनाए गए सभी नियमों और फिज़िब्लिटी सर्टिफिकेट का पालन करना जरूरी होगा. इसका मकसद यह है कि सोसाइटी पूरी तरह सक्षम और व्यावसायिक रूप से टिकाऊ हो.

10 सितंबर तक पूरी हो प्रक्रिया

जिले के उपायुक्त ने खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे 57 चयनित पंचायतों में 10 सितंबर तक सोसाइटी के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लें. जो 8 पंचायतें पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर चुकी हैं, उन्हें अगली कार्रवाई जैसे दूध संग्रहण केंद्र बनाना, ठंडा रखने की व्यवस्था और वितरण प्रणाली को विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं. बता दें कि दिनों 221 किसानों का दूध चिलिंग प्लांट में कर्मचारियों की लापरवाही से खराब हो गया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सख्ती बढ़ाने और पशुपालकों, दूध किसानों को राहत देने के साथ योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद राज्यभर में अधिकारी काफी सक्रिय हो गए हैं. 

ग्रामीणों को मिलेगा फायदा, समय पर भुगतान भी होगा

इस योजना से गांवों के पशुपालकों को काफी राहत मिलेगी. अब उन्हें अपने दूध को बेचने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा. कोआपरेटिव सोसाइटी सीधे दूध खरीदेगी और तय समय पर उसका भुगतान भी करेगी. इससे पशुपालकों को नियमित आमदनी मिलेगी और वे पशुधन की देखभाल और डेयरी गतिविधियों में ज्यादा ध्यान दे सकेंगे. बैठक में उप निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. नीरज मोहन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे. यह योजना पशुपालकों के लिए आय का स्थायी साधन बनने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर डेयरी उद्योग को भी मजबूती देगी.