Goat Farming: बकरियों की रानी बनी ये नस्ल, कम खर्च में किसान कर रहे बंपर कमाई

एक खास नस्ल की बकरी पशुपालन की दुनिया में नई क्रांति ला रही है. किसानों को कम खर्च, कम जगह और बिना ज्यादा देखभाल के शानदार कमाई का मौका मिल रहा है. छोटे किसान और युवा तेजी से इसे अपना बिजनेस बना रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इस बिजनेस के बारे में.

नोएडा | Published: 31 Mar, 2026 | 10:12 PM

Goat Farming : कहते हैं अगर मेहनत हो और सही रास्ता चुना जाए तो किस्मत जरूर बदलती है. कुछ ऐसा ही करिश्मा कर रही है एक खास नस्ल की बकरी, जिसे लोग प्यार से शहरी बकरी कहते हैं. इस बकरी ने कई पशुपालकों की जिंदगी बदल दी है. न ज्यादा खर्च, न ज्यादा मेहनत, फिर भी जबरदस्त कमाई, यही वजह है कि अब ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों के आस-पास के लोग भी इस बकरी को पालने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

बकरियों की रानी-खास नस्ल की पहचान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह नस्ल दिखने में जितनी सुंदर है, उतनी ही फायदेमंद भी है. सफेद रंग की इस बकरी पर भूरे या लाल रंग के हल्के धब्बे होते हैं जो इसे और आकर्षक बनाते हैं. इसका शरीर छोटा होता है, लेकिन वजन तेजी से बढ़ता है. नर बकरे का वजन लगभग 35 से 40 किलो तक पहुंच सकता है, जबकि मादा बकरी का वजन 25 से 30 किलो तक होता है. यह नस्ल मजबूत होती है और तेजी से बढ़ती है, इसलिए कम समय में ज्यादा उत्पादन देती है.

कम खर्च, ज्यादा मुनाफा

शहरी बकरी को पालना  बेहद आसान है. इसे चराने के लिए बड़े मैदान या चारागाह की जरूरत नहीं होती. ये छोटी जगह में भी आराम से पल जाती है. इसकी खुराक सामान्य होती है-सूखा चारा, हरी घास और दाना पर्याप्त होता है. किसी खास या महंगे भोजन की जरूरत नहीं. सबसे खास बात, इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि छोटे किसान और नए पशुपालक  इसे अपने लिए बेहतर बिजनेस मान रहे हैं.

दूध और मांस-दोनों में जबरदस्त उत्पादन

यह नस्ल दूध और मांस  दोनों के लिए मशहूर है. इसका दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बाजार में अच्छे दामों पर बिकता है. मांस की क्वालिटी भी बेहतरीन होती है- कोमल, स्वादिष्ट और कम चर्बी वाला. यही वजह है कि शहरी बकरी की मांग अब शहरों के मीट मार्केट में भी बढ़ गई है. पशुपालक बताते हैं कि एक बार पालन शुरू करने के बाद यह बकरी लगातार उत्पादन देती है और जल्दी बच्चे भी देती है, जिससे कमाई का सिलसिला रुकता नहीं.

जगह की नहीं होती दिक्कत- घर पर भी पालन संभव

इस नस्ल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आप गांव में ही नहीं, शहरों के किनारों या घर के आंगन में भी पाल सकते हैं. ज्यादा जगह न होने पर भी यह आसानी से पल जाती है. कई शहरी परिवार अब इसे घर के एक कोने में पाल रहे हैं और उससे दूध और मांस दोनों का फायदा ले रहे हैं. कम जगह में ज्यादा फायदा देने वाली यह बकरी अब छोटे स्तर के बिजनेस के लिए बेहतरीन विकल्प बन चुकी है.

पशुपालन में नई उम्मीद

आज जब नौकरियां कम और खर्चे ज्यादा हैं, तब शहरी बकरी युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आई है. केंद्र सरकार भी बकरी पालन को बढ़ावा  देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनसे कम ब्याज पर लोन और प्रशिक्षण मिल सकता है. कई युवा अब खेती-बाड़ी के साथ बकरी पालन को साइड बिजनेस के रूप में अपना रहे हैं. इस नस्ल की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है.

 

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