आंध्र प्रदेश की सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक खेती (APCNF) पहल को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित फूड प्लैनेट प्राइज से सम्मानित किया गया है. 15 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 12.5 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि वाला यह सम्मान दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार माना जाता है. यह पुरस्कार 2 जून को स्वीडन के बास्ताद में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया.
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई यह पहल आज दुनिया में प्राकृतिक खेती की सबसे बड़ी सामुदायिक मुहिम के रूप में उभरी है. पिछले एक दशक में राज्य के 18 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है.
पुरस्कार समारोह में आंध्र प्रदेश के विशेष मुख्य सचिव (कृषि) बी. राजशेखर और रायतु साधिकारा संस्था (RySS) के कार्यकारी उपाध्यक्ष टी. विजय कुमार ने पुरस्कार स्वीकार किया. पुरस्कार देने वाली कर्ट बर्गफोर्स फाउंडेशन ने APCNF को 2026 का विजेता घोषित करते हुए कहा कि यह पहल वैश्विक खाद्य प्रणाली को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण–अनुकूल बनाने की दिशा में एक प्रभावी और बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकने वाला मॉडल प्रस्तुत करती है.
आठ हजार गांवों तक पहुंची प्राकृतिक खेती
APCNF की सबसे बड़ी विशेषता इसका सामुदायिक मॉडल है. महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और 10 हजार से अधिक किसान प्रशिक्षकों के नेटवर्क के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया गया है.
आज आंध्र प्रदेश के 8,000 से अधिक गांवों में किसान वर्षभर भूमि को ढका रखने वाली फसलों, मानसून पूर्व बुवाई और स्थानीय संसाधनों पर आधारित प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपना रहे हैं. यह मॉडल पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक मृदा विज्ञान के समन्वय पर आधारित है.
जलवायु संकट से मुकाबले का मॉडल
फूड प्लैनेट प्राइज की जूरी की सह–अध्यक्ष प्रोफेसर लिंडिवे माजेले सिबांडा ने कहा कि APCNF यह साबित करता है कि प्रकृति–आधारित खेती को पूरे समुदाय और क्षेत्र स्तर पर लागू किया जा सकता है.
उनके अनुसार, इस पहल ने रासायनिक कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने के साथ–साथ किसानों की आय, जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की क्षमता और सूखे जैसी चुनौतियों के प्रति लचीलापन बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. यह कार्यक्रम दिखाता है कि कृषि का भविष्य प्रकृति के साथ मिलकर काम करने में है, न कि उसके खिलाफ.
“इस बदलाव की असली ताकत महिलाएं हैं“
रायतु साधिकारा संस्था के कार्यकारी उपाध्यक्ष टी. विजय कुमार ने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा कि इस सफलता का श्रेय आंध्र प्रदेश की लाखों महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को जाता है.
उन्होंने कहा, ‘दुनिया ने APCNF को सम्मानित किया है, लेकिन इसकी असली ताकत महिलाएं हैं. यह यात्रा खेती से नहीं, बल्कि महिलाओं को संगठित करने और समुदायों को मजबूत बनाने से शुरू हुई थी. प्राकृतिक खेती इसलिए संभव हो सकी क्योंकि महिलाओं और ग्रामीण समुदायों ने एक अलग भविष्य पर विश्वास किया.’
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल आंध्र प्रदेश का नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश है कि समुदाय आधारित परिवर्तन मिट्टी, किसानों और पर्यावरण तीनों को पुनर्जीवित कर सकता है.
पुरस्कार राशि से होगा विस्तार
फूड प्लैनेट प्राइज मिलने के बाद APCNF को अपने मॉडल का और विस्तार करने में मदद मिलेगी. पुरस्कार राशि का उपयोग देश–विदेश से आने वाले लोगों के लिए प्रदर्शन स्थलों के निर्माण, बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती लागू करने के लिए टूलकिट तैयार करने, नए शोध साझेदारी कार्यक्रम शुरू करने और “फार्मर साइंटिस्ट” कार्यक्रम को मजबूत करने में किया जाएगा.
इसके तहत किसानों को अपने खेतों पर प्रयोग करने और उनके परिणामों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
2047 तक 100 फीसदी प्राकृतिक खेती का लक्ष्य
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह भारत के लिए गर्व का क्षण है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2047 तक आंध्र प्रदेश को 100 प्रतिशत प्राकृतिक खेती वाला राज्य बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है.
वहीं कृषि मंत्री किंजारापु अच्चन्नायडू ने 18 लाख किसानों, सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को बधाई देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती स किसानों की लागत घट रही है और पहले ही वर्ष से उनकी शुद्ध आय में वृद्धि हो रही है.
विशेष मुख्य सचिव (कृषि) बी. राजशेखर ने कहा कि यह पुरस्कार सरकार की नीति, सामुदायिक संस्थाओं और वैज्ञानिक ज्ञान के सफल समन्वय का परिणाम है. उन्होंने विश्वास जताया कि आंध्र प्रदेश जल्द ही पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपनाने वाला राज्य बनेगा.
फूड प्लैनेट प्राइज 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि टिकाऊ कृषि और सामुदायिक भागीदारी के जरिए खाद्य सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है.