Bihar Lady Rosetta Potato Scheme: बिहार में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. बिहार कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2026-27 की राज्य योजना के तहत प्रसंस्करण योग्य आलू की प्रसिद्ध किस्म लेडी रोसेटा के क्षेत्र विस्तार को मंजूरी दी गई है. इस योजना के जरिए किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जिससे चिप्स और फ्रेंच फ्राइज उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आलू का उत्पादन बढ़ाया जाएगा.
17 जिलों में होगी योजना की शुरुआत
कृषि विभाग के अनुसार यह योजना राज्य के 17 जिलों में लागू की जाएगी. इनमें औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, गया, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, नालंदा, नवादा, पटना, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, सीवान और वैशाली शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य इन जिलों में लेडी रोसेटा आलू का रकबा बढ़ाकर प्रसंस्करण उद्योग के लिए पर्याप्त उत्पादन सुनिश्चित करना है. इससे किसानों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ बड़े खाद्य उद्योगों से भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी.
क्या है लेडी रोसेटा और क्यों है खास?
लेडी रोसेटा एक विशेष किस्म का आलू है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से चिप्स, फ्रेंच फ्राइज और अन्य आलू आधारित स्नैक्स बनाने में किया जाता है. इस किस्म में नमी की मात्रा कम और स्टार्च अधिक होता है, जिससे तलने के बाद चिप्स का रंग और गुणवत्ता बेहतर रहती है. कृषि विभाग का मानना है कि इस किस्म की खेती बढ़ने से बिहार में आलू प्रसंस्करण उद्योग को मजबूती मिलेगी. साथ ही दूसरे राज्यों की फूड प्रोसेसिंग कंपनियां भी किसानों से सीधे खरीद कर सकेंगी, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी.
प्रति हेक्टेयर मिलेगा 93,863 रुपये का अनुदान
योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल बीज की आवश्यकता होगी. बीज का मूल्य 4,000 रुपये प्रति क्विंटल अथवा वास्तविक मूल्य, दोनों में जो कम होगा, उसी दर पर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा. प्रति हेक्टेयर कुल इकाई लागत 1,25,150 रुपये तय की गई है. इसमें किसानों को 75 प्रतिशत यानी 93,863 रुपये का सहायतानुदान मिलेगा. यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी. पहली किस्त 70,397 रुपये इनपुट और कृषि उपादान खरीदने के लिए मिलेगी, जबकि दूसरी किस्त 23,466 रुपये स्थल निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के बाद जारी की जाएगी.
कौन उठा सकेगा लाभ और कैसे करें आवेदन?
बिहार कृषि विभाग के अनुसार इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.10 हेक्टेयर और अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि होनी चाहिए. इच्छुक किसानों को कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. विभाग का कहना है कि यह पहल केवल अनुदान तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार को आलू प्रसंस्करण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को उद्योग से जोड़कर स्थायी आय का नया अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.