बिहार में थाई मांगुर माफिया का बड़ा नेटवर्क बेनकाब! ट्रकों में छिपाकर लाई जा रही थी बैन मछली, पुलिस ने किया जब्त

बिहार के पूर्णिया में पुलिस और मत्स्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली से भरे दो ट्रक पकड़े. अधिकारियों ने मछलियों को जब्त कर नदी किनारे गड्ढा खोदकर दफना दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह मछली इंसानों की सेहत, स्थानीय मछलियों और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 May, 2026 | 05:00 PM

Thai Magur Fish: बिहार के पूर्णिया जिले में एक बार फिर प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की बड़ी खेप पकड़ी गई है. बायसी थाना क्षेत्र के डंगराहा चेक पोस्ट पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो ट्रकों को रोका, जिनमें भारी मात्रा में थाई मांगुर मछली लदी थी. अधिकारियों ने तुरंत मछलियों को जब्त कर लिया और बाद में नदी किनारे जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर पूरी खेप को दफना दिया. इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध मछली कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

बंगाल से लाई जा रही थी मछली

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिला मत्स्य पदाधिकारी विकास कुमार सिंह ने बताया कि दोनों ट्रक पश्चिम बंगाल से बिहार लाए जा रहे थे. पुलिस को पहले ही इसकी सूचना मिल गई थी, जिसके बाद चेक पोस्ट पर सख्ती बढ़ाई गई. जांच के दौरान ट्रकों में बैन थाई मांगुर मछली मिली. इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरी खेप को नष्ट कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि सरकार की रोक के बावजूद चोरी-छिपे इस मछली का कारोबार  लगातार किया जा रहा है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध धंधा चल रहा है.

सेहत के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है थाई मांगुर

मत्स्य विभाग के अनुसार थाई मांगुर मछली  इंसानों की सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक होती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विकास कुमार सिंह ने बताया कि इस मछली में आर्सेनिक, क्रोमियम, मरकरी, कैडमियम और लेड जैसे भारी धातु अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. ये शरीर के अंदर धीरे-धीरे असर करते हैं और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक इसके सेवन से लीवर, किडनी, पेट और दिल से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसके अलावा कैंसर, न्यूरोलॉजिकल और प्रजनन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार इसका सेवन शरीर के अंदरूनी अंगों को कमजोर कर सकता है.

दूसरी मछलियों और पर्यावरण को भी पहुंचाती है नुकसान

थाई मांगुर सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि जल जीवों और पर्यावरण  के लिए भी खतरा मानी जाती है. यह मांसाहारी प्रजाति की मछली है और जहां रहती है वहां दूसरी छोटी मछलियों को खा जाती है. इससे स्थानीय मछलियों की संख्या तेजी से कम होने लगती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मछली सड़ा-गला मांस खाकर भी तेजी से बढ़ती है. यही कारण है कि कई लोग कम समय में ज्यादा कमाई के लालच में इसका पालन करते हैं. बताया जाता है कि यह मछली केवल तीन महीने में 2 से 10 किलो तक वजन बढ़ा लेती है. इसकी तेजी से बढ़ने की क्षमता के कारण अवैध कारोबारियों के बीच इसकी मांग बनी रहती है.

साल 2000 से लगी है रोक, फिर भी जारी है कारोबार

थाई मांगुर मछली मूल रूप से थाइलैंड की प्रजाति है. भारत में इसके पालन और बिक्री पर साल 2000 से प्रतिबंध लगाया गया है. सरकार का मानना है कि यह मछली जन स्वास्थ्य और जलीय पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक है. इसके बावजूद कई राज्यों में चोरी-छिपे इसका कारोबार जारी है. पूर्णिया में पकड़ी गई खेप ने एक बार फिर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. मत्स्य विभाग  ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी प्रतिबंधित मछलियों की खरीदारी न करें और कहीं भी इसकी बिक्री दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें.

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Published: 21 May, 2026 | 05:00 PM

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