Buckwheat flour: नवरात्र का समय आते ही घर-घर में व्रत का विशेष भोजन बनना शुरू हो जाता है. इन दिनों कुट्टू के आटे से बनी रोटी, पूरी और पकौड़ी लोगों की पहली पसंद होती है. इसे हल्का, पौष्टिक और व्रत के लिए उपयुक्त माना जाता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब यही कुट्टू का आटा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया. कई जगहों पर लोग इसे खाने के बाद बीमार भी हुए हैं. ऐसे में एक्सपर्ट से जानते हैं कि आखिर कुट्टू का आटा कब और क्यों खतरनाक बन जाता है.
क्या होता है कुट्टू का आटा और क्यों माना जाता है हेल्दी
कुट्टू का आटा बकवीट (Buckwheat) नाम के पौधे के बीजों से तैयार किया जाता है. वैज्ञानिक भाषा में इसे फैगोपाइरम एसक्युलेंटम कहा जाता है. पंजाब में इसे ओखला नाम से भी जाना जाता है.
यह आटा पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें लगभग 75 प्रतिशत कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और 25 प्रतिशत हाई क्वालिटी प्रोटीन पाया जाता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है और वजन संतुलित रखने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस जैसे जरूरी तत्व होते हैं, जो दिल और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि कुट्टू का आटा ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रहता. एक महीने से अधिक पुराना आटा खाने योग्य नहीं माना जाता.
आखिर क्यों बन जाता है ‘जहर’
डायबेटोलॉजिस्ट और फिजिशियन डॉ. हितेश सारोगी के अनुसार, हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और सभी की एलर्जी प्रतिक्रिया भी अलग-अलग होती है. कुछ लोगों को कुट्टू खाने के बाद कोई दिक्कत नहीं होती, जबकि कुछ लोगों के शरीर में यह तुरंत रिएक्शन कर सकता है.
इसके अलावा बाजार में मिलावट भी एक बड़ी वजह है. खराब स्टोरेज, नमी और फंगस लगने से आटे में टॉक्सिन्स पैदा हो जाते हैं, जो शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.
शरीर पर कैसे करता है असर
डॉ. हितेश सारोगी बताते हैं कि कुट्टू का खराब या दूषित आटा खाने के 4 से 7 घंटे के भीतर शरीर में इसके असर दिखाई देने लगते हैं. इससे पेट में तेज दर्द, उल्टी, दस्त, भूख न लगना और लीवर पर असर जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. गंभीर स्थिति में आंतों में घाव, शरीर में पानी की कमी, हाई ब्लड प्रेशर और यहां तक कि कई बार ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. कुछ मामलों में लोगों को चक्कर, घबराहट और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं भी देखने को मिली हैं, जो शरीर पर इसके गहरे असर को दिखाती हैं.
नमी और फंगस से बढ़ता खतरा
कुट्टू का आटा खुले में रखने से उसमें नमी और फंगस जल्दी लग जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में आटे की टॉक्सिसिटी 20 गुना तक बढ़ सकती है. यही वजह है कि खुले आटे का इस्तेमाल करने वाले लोग ज्यादा बीमार पड़ते हैं. लेकिन यदि कुट्टू को साबुत खरीदकर साफ-सफाई के साथ पिसवाया जाए और सही तरीके से स्टोर किया जाए, तो इसके नुकसान की संभावना काफी कम हो जाती है.
व्रत में खानपान का रखें खास ध्यान
डॉ. हितेश सारोगी के मुताबिक, व्रत के दौरान शरीर को संतुलित पोषण देना बहुत जरूरी है. शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए, इसलिए दिन में 6 से 8 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए.
फल, ड्राई फ्रूट्स और हल्के खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए ताकि शरीर को ऊर्जा मिलती रहे. लंबे समय तक खाली पेट रहने से एसिडिटी और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं.
सावधानी ही है सबसे बड़ा बचाव
कुट्टू का आटा पूरी तरह से खराब नहीं है, बल्कि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद है. लेकिन थोड़ी सी लापरवाही इसे खतरनाक बना सकती है. हमेशा ताजा, साफ और अच्छी गुणवत्ता वाला आटा ही इस्तेमाल करें. अगर पहले कभी इससे एलर्जी हो चुकी है, तो दोबारा इसका सेवन करने से बचना ही बेहतर है. याद रखें, व्रत के दौरान सेहत का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना आस्था का पालन करना.