Cheetah Project: भारत में तेजी से बढ़ रहे चीते, कूनो पहुंचे 9 नए मेहमान.. अब इतनी हो गई संख्या
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए 9 नए चीतों को सुरक्षित बाड़ों में रखा गया है. इन चीतों के आने से भारत में कुल संख्या बढ गई है. विशेषज्ञ उनकी निगरानी कर रहे हैं और बाद में उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा.
Wildlife Conservation: मध्य प्रदेश के जंगलों में एक बार फिर खुशखबरी आई है. लंबे समय बाद भारत में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब एक और बड़ा कदम उठाया गया है. अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 9 नए चीते भारत लाए गए हैं और उन्हें कूनो नेशनल पार्क में छोड़ दिया गया है. इन नए चीतों के आने से देश में कुल चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो गई है. यह चीता संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है.
बोत्सवाना से आए 9 नए चीते
कूनो नेशनल पार्क में एक खास पल देखने को मिला जब बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों को सुरक्षित बाड़ों में छोड़ा गया. इन चीतों में 6 मादा और 3 नर शामिल हैं. यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है जो भारत लाया गया है. इससे पहले नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए जा चुके हैं. नए चीतों के आने से कूनो में चीतों की संख्या बढ़ गई है और पूरे देश में इनकी कुल संख्या 48 हो चुकी है. इनमें से कई चीते भारत में ही पैदा हुए हैं, जो इस योजना की सफलता दिखाते हैं.
विमान और हेलीकॉप्टर से पहुंचे कूनो
चीतों को विशेष विमान से भारत लाया गया. विमान रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर उतरा. वहां विशेषज्ञों की टीम ने चीतों की जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी स्वस्थ हैं. इसके बाद सुबह हेलीकॉप्टर की मदद से चीतों को कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया. पार्क में सुरक्षित उतरने के लिए पांच हेलीपैड बनाए गए थे. सभी चीतों को सुरक्षित क्वारंटाइन बाड़ों में पहुंचा दिया गया. पूरी प्रक्रिया सावधानी से की गई ताकि चीतों को कोई परेशानी न हो.
India’s sky high efforts for cheetahs 🐆 🇮🇳!
The cheetahs from Botswana were extended a smooth air ride to India by IAF’s C17 Globemaster from 81 squadron (the Skylords), and further to Kuno by IAF’s helicopters.
The seamless coordination, precision flying, and unwavering… pic.twitter.com/WKFpsfLmgS
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) February 28, 2026
पहले एक महीने रहेगा खास ध्यान
कूनो पहुंचने के बाद सभी चीतों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा गया है. उन्हें पहले क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया है. करीब एक महीने तक विशेषज्ञ उनकी सेहत और व्यवहार पर नजर रखेंगे. इस दौरान यह देखा जाएगा कि वे नए माहौल में ठीक से ढल रहे हैं या नहीं. जब विशेषज्ञों को लगेगा कि चीते पूरी तरह स्वस्थ और तैयार हैं, तब उन्हें मुख्य जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव
चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही
चीतों की संख्या बढ़ना इस योजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है. कूनो में पहले से मौजूद कई मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया है. कूनो में मौजूद चीतों में से कई भारत में ही पैदा हुए हैं. इसके अलावा कुछ चीतों को दूसरे वन क्षेत्रों में भी छोड़ा गया है. इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में भारत में चीतों की संख्या और बढ़ेगी और यह जानवर फिर से यहां बस सकेगा.
संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
चीतों को कूनो में छोड़ने के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे. उन्होंने चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा. विशेषज्ञों का कहना है कि कूनो का जंगल चीतों के लिए उपयुक्त है. यहां पर्याप्त शिकार और सुरक्षित माहौल मिलता है. यह अभियान दुनिया में वन्यजीव संरक्षण का एक अच्छा उदाहरण माना जा रहा है. भारत में कभी चीते खत्म हो गए थे, लेकिन अब उन्हें फिर से बसाने की कोशिश सफल होती दिख रही है. चीतों की बढ़ती संख्या से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में भारत के जंगलों में फिर से चीते दौड़ते दिखाई देंगे.