Report: महंगाई का असर आपकी थाली पर! टमाटर, प्याज और चिकन हुए महंगे, जानें जून में कितना बढ़ा खर्च

Food Inflation: क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में शाकाहारी थाली की लागत 5 फीसदी और मांसाहारी थाली की लागत 6 फीसदी बढ़ गई है. टमाटर, प्याज, खाद्य तेल, एलपीजी और चिकन की बढ़ी कीमतों ने रसोई का खर्च बढ़ाया है, जबकि आलू सस्ता होने से कुछ राहत मिली.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 9 Jul, 2026 | 04:18 PM

Roti Rice Rate Report: अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ समय से घर का किचन खर्च बढ़ गया है, तो यह सिर्फ आपका एहसास नहीं है. ताजा रिपोर्ट भी यही बता रही है. क्रिसिल इंटेलिजेंस की ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में घर पर बनने वाली शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थालियां पिछले साल के मुकाबले महंगी हो गई हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहारी थाली की लागत में 5 फीसदी और मांसाहारी थाली की लागत में 6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह टमाटर, प्याज, खाद्य तेल, एलपीजी गैस और चिकन की बढ़ी हुई कीमतें हैं.

टमाटर और प्याज ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता

इस बार सबसे ज्यादा असर टमाटर की कीमतों ने डाला है. पिछले साल जून में जहां टमाटर करीब 32 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं इस साल इसकी कीमत बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई. यानी एक साल में करीब 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी और मार्च में ज्यादा गर्मी पड़ने की वजह से टमाटर की फसल की बुवाई प्रभावित हुई.

उत्पादन कम होने से बाजार में सप्लाई घटी और कीमतें बढ़ गईं. प्याज भी लोगों को राहत नहीं दे पाया. रबी सीजन का स्टोर किया हुआ प्याज बाजार में आने के कारण इसकी कीमतों में भी करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

तेल और गैस ने भी बढ़ाया रसोई का खर्च

खाना बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल और एलपीजी गैस सिलेंडर भी महंगे हो गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार दोनों की कीमतों में सालभर में करीब 10-10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर भारत समेत कई देशों में खाद्य तेल और ईंधन की कीमतों पर देखने को मिला. हालांकि बढ़ती महंगाई के बीच आलू ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है. नई रबी फसल बाजार में आने के बाद आलू की कीमतों में करीब 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. अगर आलू सस्ता नहीं होता तो शाकाहारी थाली की लागत और ज्यादा बढ़ सकती थी.

चिकन महंगा होने से नॉनवेज थाली पर ज्यादा असर

मांसाहारी लोगों के लिए भी जून का महीना महंगा साबित हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में करीब 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. दरअसल, तेज गर्मी के कारण पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों की मृत्यु दर बढ़ी. कई पक्षियों का वजन भी सामान्य से कम रहा और नए चूजों की संख्या भी घटी. इससे बाजार में चिकन की सप्लाई कम हुई और कीमतें बढ़ गईं. रिपोर्ट बताती है कि मांसाहारी थाली की कुल लागत में चिकन की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी होती है. इसलिए चिकन महंगा होने का सीधा असर पूरी थाली पर पड़ा.

एक महीने में भी बढ़ा खर्च

सिर्फ सालाना ही नहीं, मई के मुकाबले जून में भी खाने की लागत बढ़ी है. जून में शाकाहारी थाली की कीमत करीब 4 फीसदी और मांसाहारी थाली की कीमत करीब 3 फीसदी बढ़ी. इस दौरान टमाटर 17 फीसदी, प्याज 8 फीसदी और आलू 5 फीसदी महंगा हुआ. वहीं चिकन की कीमतों में भी करीब 2 फीसदी की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई.

अगर सब्जियों की नई फसल समय पर बाजार में आती है और सप्लाई सामान्य रहती है, तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन अगर सप्लाई प्रभावित हुई, तो खर्च ऊंचा बना रह सकता है. फिलहाल साफ है कि आम आदमी की थाली पर महंगाई का असर लगातार दिखाई दे रहा है.

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Published: 9 Jul, 2026 | 04:18 PM

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