कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में 3.1 फीसदी तेजी का अनुमान, फसल विविधीकरण पर सरकार का फोकस
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में केंद्र सरकार ने फसल विविधीकरण पर जोर दिया है. बागवानी क्षेत्र कृषि GVA में 33 प्रतिशत योगदान के साथ मजबूत उभरता क्षेत्र बना है. पशुपालन और मत्स्य पालन ने कृषि वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
Agriculture Budget 2026: केंद्र सरकार ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण को अपनाने पर जोर दिया है. सरकार ने कहा कि इससे पोषण, मिट्टी की सेहत, जल स्तर और किसानों की आमदनी- चारों को फायदा होगा. साथ ही, बागवानी क्षेत्र की सराहना की गई, जिसने कृषि के सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में 33 प्रतिशत का योगदान देकर खुद को एक मजबूत क्षेत्र के रूप में स्थापित किया है. गुरुवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी और करोड़ों लोगों की आजीविका को मजबूत करेगी.
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्रों में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पारंपरिक फसलों में विविधीकरण अपनाया जाए, ताकि खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सके. सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषि अवसंरचना कोष और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बताया.
कृषि की औसत वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि 3.5 प्रतिशत रही. पिछले दस वर्षों (FY16- FY25) में कृषि की औसत वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो पहले के दशकों की तुलना में सबसे अधिक है. इसमें पशुपालन (7.1 प्रतिशत) और मत्स्य पालन व एक्वाकल्चर (8.8 प्रतिशत) का बड़ा योगदान रहा, जबकि फसल क्षेत्र की वृद्धि 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, बागवानी क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था का एक उज्ज्वल पक्ष बनकर उभरा है और कृषि के सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में इसका योगदान करीब 33 प्रतिशत है. बागवानी उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है. यह 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन पहुंच गया.
इस अवधि में इसका GVA करीब 195 प्रतिशत बढ़ा
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भले ही खाद्यान्न उत्पादन में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई हो, लेकिन पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे उच्च मूल्य वाले सहायक क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में तेजी से अहम भूमिका निभा रहे हैं.सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015 से 2024 के बीच पशुपालन क्षेत्र में जबरदस्त विस्तार देखा गया. इस अवधि में इसका GVA करीब 195 प्रतिशत बढ़ा और मौजूदा कीमतों पर इसकी औसत वार्षिक वृद्धि दर 12.77 प्रतिशत रही. वहीं, मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है. 2014 से 2025 के दौरान मछली उत्पादन में 140 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जो करीब 88.14 लाख टन है.
बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन तक पहुंचा
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 329.68 मिलियन टन से अधिक है. इस वृद्धि में फल (114.51 मिलियन टन), सब्जियां (219.67 मिलियन टन) और अन्य बागवानी फसलें (33.54 मिलियन टन) शामिल हैं. सर्वेक्षण ने कहा कि यह व्यापक विस्तार कृषि उत्पादन और मूल्य में बागवानी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है.