किसानों की बढ़ेगी कमाई, सरकार तैयार कर रही है रोडमैप.. अन्नदाता को दिए जाएंगे उन्नत बीज
मुख्यमंत्री ने अगले पांच साल के लिए बीज उत्पादन, गुणवत्ता और उपलब्धता को बढ़ाने का ठोस रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण में आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि किसानों को हमेशा प्रमाणित बीज मिलें.
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के किसानों को अब उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि किसानों की आय और पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत बीजों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. यह तभी संभव होगा जब उन्नत बीज विकसित किए जाएंगे. उन्होंने अगले पांच साल के लिए बीज उत्पादन, गुणवत्ता और उपलब्धता को बढ़ाने का ठोस रोडमैप तैयार करने को कहा है. यानी आने वाले पांच साल में किसानों को ज्यादा पैदावार देने वाली उन्नत और रोग-प्रतिरोध किस्में मिलेंगी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि उत्पादन की असली ताकत उच्च गुणवत्ता, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए नई और आधुनिक बीज नीति की जरूरत है. चूंकि भूमि का आकार लगातार घट रहा है, इसलिए सिर्फ रकबे पर ध्यान देने के बजाय प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देना जरूरी है. उन्होंने निर्देश दिए कि उच्च उपज देने वाली, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु बीजों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी नीति बनाई जाए जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान करे.
उन्नत बीज उत्पादन के लिए तैयार होगा रोडमैप
मुख्यमंत्री ने अगले पांच साल के लिए बीज उत्पादन, गुणवत्ता और उपलब्धता को बढ़ाने का ठोस रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण में आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि किसानों को हमेशा प्रमाणित बीज मिलें. भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की ट्रैसेबिलिटी अनिवार्य की जाएगी और मिलावटी या घटिया बीज बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. किसानों तक हर बीज पैकेट पूरी तरह प्रमाणित और परीक्षणित होना चाहिए. उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, ICAR संस्थानों और निजी बीज उद्योग को एक मंच पर लाकर अनुसंधान, नवाचार और किस्म-रिलीज प्रक्रिया तेज करने की भी आवश्यकता बताई.
फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति बनाने का निर्देश दिया. उन्होंने अगले पांच वर्षों में प्रदेश में कम से कम पांच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की भी बात कही. ये पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण जैसी सभी सुविधाओं से लैस एकीकृत केंद्र होंगे. मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ने का निर्देश दिया, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेतों में तकनीक के प्रसार के बीच बेहतर समन्वय हो सके.
स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के दिए निर्देश
उन्होंने नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप प्रत्येक केंद्र को क्षेत्र-विशेष फसलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने और प्रगतिशील किसानों को भी इसमें शामिल करने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का संतुलन बने. साथ ही, मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर बल देते हुए अधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और सोलर पैनल इकाइयों के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए. इससे किसानों का सिंचाई खर्च कम होगा, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा और रोजगार, निवेश तथा कृषि अवसंरचना मजबूत होगी.