सरसों पर बढ़ा रोग का खतरा, आज ही कर दें इस दवा का छिड़काव.. नहीं लगेगी लाही

जनवरी के पहले ही कड़ाके की ठंड और कोहरे से सरसों की फसल पर लाही कीट का खतरा बढ़ गया है. किसान समय पर नियंत्रण नहीं करेंगे तो पैदावार घट सकती है. इमिडाक्लोरोपिड 17.8 फीसदी दवा का छिड़काव करके कीट को नियंत्रित किया जा सकता है और फसल सुरक्षित रहती है.

नोएडा | Updated On: 20 Dec, 2025 | 06:34 PM

Mustard cultivation: जनवरी का महीना शुरू होने में अभी 10 दिन बाकी है, लेकिन अभी से ही कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है. साथ ही कोहरे के साथ शीतलहर और पाले का भी असर देखे को मिल रहा है. इससे रबी फसल की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है. खास कर सरसों उगाने वाले किसान टेंशन में आ गए हैं. क्योंकि फसल में लाही लगने की संभावना बढ़ गई है. किसानों को कहना है कि अगर समय रहते लाही का इलाज नहीं किया गया, इसकी चपेट में आकर फसल बर्बाद हो सकती है. इससे पैदावार में गिरावट आएगी, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. लेकिन किसानों को लाही को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम कुछ ऐसे उपाय के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, जिसे अपनाते ही सरसों की फसल पर लाही का असर नहीं पड़ेगा.

दरअसल, केंद्र सरकार देश में सरसों की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इससे देश में सरसों का रकबा बढ़ा भी है. लेकिन इस साल बहुत पहले ही कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है. इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है. हालांकि, इस साल सरसों की फसल  अच्छी है और अब यह फूल आने की अवस्था (फ्लावरिंग स्टेज) में पहुंच गई है. यह फसल के लिए महत्वपूर्ण समय है, लेकिन इसी दौरान लाही (एफिड) कीट का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर समय पर इस कीट पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरी फसल को नुकसान हो सकता है.

कीट से पहुंचता है फसलों को नुकसान

कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, लाही एक छोटा लेकिन बहुत नुकसान पहुंचाने वाला कीट है. यह सरसों के फूल, डंठल और कोमल हिस्सों से पौधे का रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और दाने ठीक से नहीं बन पाते हैं. इसका असर सीधे पैदावार पर पड़ता है. अगर किसान थोड़ी सावधानी बरतें और समय पर सही उपाय करें, तो लाही कीट से फसल को आसानी से बचाया जा सकता है.

इतनी मात्रा में करें इस दवा का छिड़काव

एक्सपर्ट का कहना है कि फ्लावरिंग स्टेज में सरसों की फसल की नियमित निगरानी करें और जैसे ही एफिड दिखें, तुरंत नियंत्रण करें. इसके लिए इमिडाक्लोरोपिड 17.8 फीसदी दवा का इस्तेमाल करें. 1 मिलीलीटर दवा को 1 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर बराबर छिड़काव करें. सही समय और मात्रा में छिड़काव करने से कीट पूरी तरह नियंत्रित हो जाता है और फसल सुरक्षित रहती है. समय पर कीट नियंत्रण  से उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय भी बढ़ती है. इसलिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाकर तिलहनी फसलों से देश को आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान देना चाहिए.

Published: 20 Dec, 2025 | 06:31 PM

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