तमिलनाडु में सांबा धान की होगी समय पर खरीदी, क्रय केंद्रों पर रहेगी अच्छी व्यवस्था

कावेरी डेल्टा के थंजावुर और तिरुवरूर जिलों में सांबा धान की कटाई अभी धीमी है, जबकि पोंगल का त्योहार गुजर चुका है. किसान इसका कारण देर से बुवाई बता रहे हैं. इस बार कुरुवई फसल की खेती का क्षेत्र बढ़ गया था और उसकी कटाई पूरी नहीं हुई, इसलिए सांबा फसल के लिए खेत तैयार करने का समय नहीं मिला.

Kisan India
नोएडा | Published: 19 Jan, 2026 | 10:22 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन (TNCSC) इस साल की सांबा फसल के पहले डायरेक्ट प्रोक्योरमेंट सेंटर (DPC) खोलने की तैयारी में है. किसानों ने अधिकारियों से कहा है कि सभी DPC में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर हो, ताकि धान बारिश या धूप से सुरक्षित रहे और किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े. इस साल जिले में लगभग 1.33 लाख एकड़ में खेती होने से 2.77 लाख मीट्रिक टन धान की उम्मीद है. इसके लिए 14 ब्लॉकों में कुल 146 DPC बनाने का प्रस्ताव है. TNCSC के वरिष्ठ प्रबंधक कुमारवेलु ने कहा कि पिछले साल 140 DPC संचालित हुए थे, और इस साल संख्या बढ़ सकती है.

किसानों ने कहा है कि धान के बैग बारिश या धूप से खराब न हों. TMC (M) के किसानों के विंग के राज्य कोषाध्यक्ष वायलुर एन राजेंद्रन ने सुझाव दिया कि DPC की ऊंचाई कम से कम एक फुट बढ़ाकर ग्रेवल डालें और टारपॉलिन का इस्तेमाल करें. उन्होंने उन्नत विणिंग मशीन और पोर्टेबल हैंडहेल्ड सिलाई मशीन की आपूर्ति भी मांग की, ताकि खरीद प्रक्रिया तेज हो. भंडारण सुविधाओं के बारे में कुमारवेलु ने कहा कि जिले में सात गोदाम हैं, जिनकी कुल क्षमता 26,200 टन और दो अर्ध-कवर्ड गोदाम की क्षमता 3,300 टन हैं. धान बैग रोजाना मिलों में हुलिंग के लिए भेज दिए जाते हैं, इसलिए DPC में कोई बैग लंबा इंतजार नहीं करता.

तिरुवरूर जिलों में सांबा धान की कटाई अभी धीमी

वही, कावेरी डेल्टा के थंजावुर और तिरुवरूर जिलों में सांबा धान की कटाई अभी धीमी है, जबकि पोंगल का त्योहार गुजर चुका है. किसान इसका कारण देर से बुवाई बता रहे हैं. इस बार कुरुवई फसल की खेती का क्षेत्र बढ़ गया था और उसकी कटाई पूरी नहीं हुई, इसलिए सांबा फसल के लिए खेत तैयार करने का समय नहीं मिला. कृषि और किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, थंजावुर जिले में 1.31 लाख हेक्टेयर में बोई गई सांबा धान में से केवल 2,200 हेक्टेयर की कटाई हुई है. तिरुवरूर जिले में 1.46 लाख हेक्टेयर में से केवल 2,150 हेक्टेयर की फसल ही काटी गई है.

किसानों ने सांबा धान की बुवाई की

थंजावुर के किसान और तमिलनाडु किसान संघ के महासचिव सामी नटराजन ने कहा कि किसानों ने सांबा धान की बुवाई और नर्सरी तभी शुरू की जब कुरुवई धान की कटाई पूरी हुई. क्योंकि इस बार कुरुवई की खेती दोगुने क्षेत्र में हुई थी, इस वजह से सांबा धान की बुवाई भी देर से हुई और कटाई भी देर से होगी. तमिलनाडु किसान संघ के राज्य महासचिव और तिरुवरूर जिले के किसान पी एस मसिलमनी ने भी सांबा धान की कटाई में देरी का कारण कुरुवई धान की खेती के क्षेत्र में वृद्धि बताया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, कई किसानों की युवा सांबा फसल भारी बारिश के कारण नष्ट हो गई. इसके बाद उन्हें फसल की बुवाई दोबारा करनी पड़ी, जिससे खेती में और देरी हुई.

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