तमिलनाडु के धान किसानों को भारी नुकसान, सिंचाई के अभाव में सूख रही हैं फसलें

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में सिंचाई की कमी और कम बारिश के कारण सांबा धान की फसल लगभग 10,000-20,000 हेक्टेयर में बर्बाद हुई. किसानों ने सरकार से मुआवजा और समर्थन की मांग की है. बीमा योजना कुछ हद तक आर्थिक नुकसान की भरपाई करेगी.

Kisan India
नोएडा | Published: 30 Jan, 2026 | 10:21 PM

Agriculture News: तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के धान किसान दो साल की अच्छी फसल के बाद इस बार भारी नुकसान के सामना कर रहे हैं. जिले के कई हिस्सों में सांबा धान की फसल सूखकर बंजर हो गई है, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत बेकार हो गई. यह संकट इस क्षेत्र में सतत सिंचाई समाधान की आवश्यकता को स्पष्ट करता है. कृषि विभाग के प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 10,000- 20,000 हेक्टेयर फसल सूख गई है. सांबा धान जिले की प्रमुख फसलों में से एक है और इसे लगभग 1.42 लाख हेक्टेयर में उगाया जाता है. खासकर कदालाड़ी, कामुथी, मुदुकुलथुर और परमाकुडी ब्लॉक में पर्याप्त वर्षा न होने के कारण फसल प्रभावित हुई.

आईएमडी के अनुसार, दिसंबर 2025 में रामनाथपुरम जिले में उत्तर-पूर्व मॉनसून के दौरान औसत वर्षा 71 मिमी, जो सामान्य से 48 फीसदी कम थी. जनवरी 2026 में जिले में औसत वर्षा केवल 14.9 मिमी रही, जबकि सामान्य 26.6 मिमी है, यानी 44 फीसदी कम. किसानों ने कई प्रदर्शन और याचिकाएं देकर सिंचाई की कमी से हुए नुकसान को उजागर किया था. इसके बाद कृषि विभाग ने पिछले सप्ताह सर्वेक्षण कर स्थिति का आकलन किया.

कई ब्लॉकों में सिंचाई की कमी

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कई ब्लॉकों में सिंचाई  की कमी के कारण फसल सूख गई है. प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 10,000-20,000 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है. बाद में होने वाले फसल गणना सर्वेक्षण से नुकसान का सटीक अनुमान सामने आएगा. किसान इस स्थिति से निराश हैं. मुधुकुलथुर के मेला कोडुंबालुर गांव के किसान मुथुरामालिंगम ने कहा कि सिर्फ एक बार पानी की जरूरत थी ताकि फसल पूरा मौसम निकाल सके, लेकिन उससे पहले ही फसल सूख गई. जनवरी के मध्य तक हमने बारिश की उम्मीद जताई, लेकिन वह भी नहीं हुई.

अधिकांश किसानों ने फसल बीमा कराया है

किसानों पर आर्थिक असर गंभीर है. प्रति एकड़ लगभग 35,000 रुपये खर्च हुए और मौसम को संभालने के लिए अतिरिक्त खर्च भी किया गया. कई किसानों ने तमिलनाडु सरकार से मुआवजे की मांग  की है. किसान नेता एम. मलेसामी ने याद दिलाया कि 2022 में लगभग 70 फीसदी फसल सूख गई थी, जबकि 2023 में बेमौसमी बारिश से फसल जलमग्न हो गई थी. कृषि अधिकारियों ने कहा कि अधिकांश किसानों ने फसल बीमा कराया हुआ है, इसलिए बीमा दावा कुछ हद तक नुकसान की भरपाई करेगा.

सुपरफाइन धान की बिक्री में तेजी

वहीं, कल ही खबर सामने आई थी कि तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में सांबा धान की कटाई  तेजी पकड़ रही है, जिससे बारीक और सुपरफाइन धान की बिक्री में तेजी आई है. साथ ही दाम पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं. राइस मिलरों के मुताबिक, इस सीजन में प्रीमियम किस्मों की मांग मजबूत बनी हुई है, क्योंकि पड़ोसी राज्यों से धान की आपूर्ति कम हुई है.

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Published: 30 Jan, 2026 | 10:21 PM

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