UP, पंजाब और बिहार में घटा गेहूं का रकबा, पर इन राज्यों ने इस कमी की कर दी भरपाई

इस साल उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार में गेहूं की बुआई थोड़ी कम रही, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान में बढ़ोतरी से कुल क्षेत्र रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा. गुजरात में भी बुआई बढ़ी, महाराष्ट्र में घटी. तापमान, लस्टर लॉस और सरकारी मानकों की ढील के कारण उत्पादन और पैदावार पर असर पड़ सकता है.

नोएडा | Updated On: 24 Jan, 2026 | 09:58 AM

Wheat Farming: इस साल उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार में गेहूं की बुआई का रकबा थोड़ा कम हुआ है, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान में बड़ी बढ़ोतरी ने इसकी भरपाई कर दी है. मध्य प्रदेश में 8 लाख हेक्टेयर से ज्यादा और राजस्थान में करीब 4 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ देशभर में गेहूं का कुल रकबा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. 2025- 26 में कुल गेहूं बुआई क्षेत्र 334.17 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर से करीब 2 फीसदी ज्यादा है.

हालांकि कुल उत्पादन इस बात पर निर्भर करेगा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में पैदावार कैसी रहती है, क्योंकि इन राज्यों में फसल जल्दी पकती है और फरवरी में तापमान का असर दाने भरने की प्रक्रिया पर पड़ता है. प्रमुख छह राज्यों में, जो देश के करीब 90 फीसदी गेहूं क्षेत्र को कवर करते हैं, उत्तर प्रदेश में रकबा 2 फीसदी घटकर 94.13 लाख हेक्टेयर, पंजाब में 1 फीसदी कम होकर 34.89 लाख हेक्टेयर और बिहार में 13 फीसदी घटकर 19.92 लाख हेक्टेयर रहा. वहीं मध्य प्रदेश में रकबा 11 फीसदी बढ़कर 85.73 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 12 फीसदी बढ़कर 35.49 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 3 फीसदी बढ़कर 24.48 लाख हेक्टेयर हो गया है.

गुजरात में गेहूं के रकबे में बढ़ोतरी

गुजरात में भी किसानों ने गेहूं की बुआई 3.3फीसदी बढ़ाकर 13.24 लाख हेक्टेयर कर दी है, जबकि महाराष्ट्र में यह रकबा 3.3 फीसदी घटकर 11.49 लाख हेक्टेयर रह गया. कृषि वैज्ञानिक एस.के. सिंह के अनुसार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ जिलों तथा गुजरात में तापमान बढ़ने का खतरा अधिक रहता है. पिछले साल सरकार ने राजस्थान के सभी जिलों और मध्य प्रदेश के चार जिलों में गेहूं की न्यूनतम गुणवत्ता मानकों को ढील दी थी, ताकि किसान अपने उत्पाद को एमएसपी पर आसानी से बेच सकें. उन्होंने कहा कि अधिक जलवायु-सहिष्णु किस्मों  के अपनाने से कम पैदावार का खतरा हर साल कम हो रहा है.

गेहूं को 6 फीसदी तक अनुमति दी गई

अप्रैल 2025 में खाद्य मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के उज्जैन, रतलाम और झाबुआ जिलों में गेहूं की खरीद के दौरान कुछ किस्मों (जैसे पुसा मंगल) के ‘लस्टर लॉस’ की वजह से खारिज होने से बचाने के लिए मानकों में 10फीसदी तक की ढील दी. मार्च 2025 में राजस्थान में भी मानक ढीले किए गए सिकुड़े और टूटे अनाज के लिए 20 फीसदी और लस्टर लॉस के लिए 10 फीसदी तक की छूट दी गई. पहले की गर्मी और मौसम के असामयिक बदलाव के कारण हल्के नुकसान वाले गेहूं को 6 फीसदी तक अनुमति दी गई.

न्यूनतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहा

जनवरी 21 तक समाप्त सप्ताह में सभी गेहूं उगाने वाले राज्यों  में रात का न्यूनतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहा, जबकि दिन का अधिकतम तापमान अधिकांश जगह सामान्य रहा और 28 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं था. केवल महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सरकार ने 2025-26 में गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 119 मिलियन टन रखा है, जिसे अप्रैल से कटाई के दौरान हासिल किया जाएगा. पिछली बार 2024-25 में उत्पादन अब तक का रिकॉर्ड 117.54 मिलियन टन था.

Published: 24 Jan, 2026 | 09:58 AM

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