Deep Sea Fishing Mission: भारत सरकार समुद्री मत्स्य पालन को आधुनिक, सुरक्षित और ज्यादा लाभदायक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. 9 जुलाई को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए ऑथराइजेशन लेटर (Letter of Authorisation-LOA) की शुरुआत की जाएगी. इसी मौके पर ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) भी लॉन्च होगा. सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मछुआरों को गहरे समुद्र में बेहतर अवसर मिलेंगे, समुद्री खाद्य उत्पादन बढ़ेगा और भारत के समुद्री निर्यात को भी मजबूती मिलेगी.
क्या है प्राधिकरण पत्र (LOA)?
एलओए (LOA) यानी प्राधिकरण पत्र एक सरकारी अनुमति पत्र है. इसे मिलने के बाद भारतीय झंडे वाले मछली पकड़ने के जहाज तय नियमों के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ सकेंगे. पहले इसकी मंजूरी के लिए कई अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है. आवेदन करने से लेकर मंजूरी मिलने, निगरानी और जहाजों की ट्रैकिंग तक का पूरा काम एक ही डिजिटल पोर्टल के जरिए होगा.
इससे प्रक्रिया पहले से आसान, तेज और पारदर्शी बनेगी. एलओए लेने वाले सभी जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन करना होगा. उन्हें पर्यावरण का ध्यान रखते हुए तय सीमा में ही मछली पकड़नी होगी और समुद्री संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना होगा.
मछुआरों और सहकारी समितियों को होगा फायदा
सरकार इस योजना के तहत कई मत्स्य सहकारी समितियों, मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) को भी ऑथराइजेशन लेटर देगी. इससे मछुआरों को गहरे समुद्र में मिलने वाली ज्यादा कीमत वाली मछलियां पकड़ने का मौका मिलेगा. इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और छोटे मछुआरों को भी आधुनिक मत्स्य पालन से जुड़ने का अवसर मिलेगा. कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,000 मछुआरे, महिला मत्स्य पालक और मत्स्य किसान भी हिस्सा लेंगे.
💠 Vice President C.P. Radhakrishnan to launch Letter of Authorisation for Sustainable Harnessing of Fisheries in the High Seas and Odisha Deep Sea Fishing Mission Document
🗓️9th July 2026
📍Bhubaneshwar, Odisha💠 The launch Letter of Authorisation (LoA) and Odisha Deep Sea…
— PIB India (@PIB_India) July 8, 2026
क्या है ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन?
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) राज्य सरकार की ब्लू इकोनॉमी से जुड़ी एक बड़ी योजना है. इस मिशन का उद्देश्य गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देना, आधुनिक मत्स्य ढांचा तैयार करना, समुद्री फूड प्रोसेसिंग और निर्यात बढ़ाना, मछुआरों की आय बढ़ाना तथा नए रोजगार के अवसर पैदा करना है. इसके साथ ही समुद्री संसाधनों का संतुलित और टिकाऊ उपयोग भी इस योजना का अहम हिस्सा है, ताकि भविष्य में भी समुद्र की संपदा सुरक्षित रह सके.
भारत के लिए क्यों है यह योजना अहम?
भारत के पास करीब 11,099 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है. इस समुद्री क्षेत्र से हर साल करीब 58.6 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया जा सकता है. इस क्षेत्र से देश के करीब 50 लाख मछुआरों की आजीविका जुड़ी हुई है. यही वजह है कि सरकार मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 73,890 करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात किया. इससे साफ है कि देश का मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और अर्थव्यवस्था में भी अहम योगदान दे रहा है.
गहरे समुद्र में छिपे हैं नए अवसर
फिलहाल देश की ज्यादातर मछली पकड़ने वाली नौकाएं तट से करीब 40 से 50 समुद्री मील के दायरे में ही मछली पकड़ती हैं. जबकि इससे कहीं आगे गहरे समुद्र में टूना जैसी महंगी और ज्यादा मांग वाली मछलियों का बड़ा भंडार मौजूद है. नई LOA व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय मछुआरे वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से गहरे समुद्र में जाकर मछली पकड़ सकेंगे. इससे न केवल उनकी कमाई बढ़ेगी, बल्कि भारत का समुद्री खाद्य निर्यात भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है.
सरकार का क्या है लक्ष्य?
सरकार का उद्देश्य सिर्फ मछली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मछुआरों की आय में सुधार करना, समुद्री संसाधनों का संरक्षण करना और भारत को वैश्विक स्तर पर डीप सी फिशिंग के क्षेत्र में मजबूत बनाना है. नई LOA व्यवस्था और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं. इससे आने वाले वर्षों में देश के लाखों मछुआरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और अधिक आय के नए अवसर मिलने की उम्मीद है.