अंडे में होते हैं हजारों छेद, फिर भी अंदर नहीं जाता पानी.. जानें इसके पीछे का विज्ञान

पोल्ट्री फार्मर्स ब्रॉयलर्स वेलफेयर फेडरेशन (उत्तर प्रदेश) के प्रेसिडेंट एफएम शेख ने बताया कि ये छोटे-छोटे छेद प्राकृतिक होते हैं. अंडा जब नया निकलता है तब थोड़ा नरम होता है और बाद में सख्त हो जाता है. लेकिन छिद्र वैसे ही बने रहते हैं. उन्होंने कहा अगर मुर्गी के खाने में कैल्शियम कम हो, तो अंडे का छिलका पतला या कमजोर हो जाता.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 05:15 PM

Egg production: देश में रोज करोड़ों अंडे की खपत है. कोई अंडे का आमलेट बनाता है तो किसी को उबले अंडा खाना पसंद है. यानी किसी न किसी रूप में लाखों परिवार रोज अंडे का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन बहुत कम ही लोगों को मालूम होगा कि अंडे में छेद भी होते है. भले ही आपको विश्वास नहीं हो, लेकिन यह सच्चाई है. खास बात यह है कि अंडे में एक या दो छेद नहीं, बल्कि हजारों की संख्या में होते हैं. ये छेद इतने अधिक बारीक होते हैं कि इनके अंदर पानी भी नहीं घुस पाता है. पोल्ट्री फार्मर्स ब्रॉयलर्स वेलफेयर फेडरेशन (उत्तर प्रदेश) के प्रेसिडेंट एफएम शेख का कहना है कि अंडे में छेद बहुत छोटे होते हैं, जिसे नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है.

पोल्ट्री फार्मर्स ब्रॉयलर्स वेलफेयर फेडरेशन (उत्तर प्रदेश) के प्रेसिडेंट एफएम शेख ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि देश में करोड़ों के संख्या में रोज अंडे खाए जाते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि वे जिस अंडे को खा रहे हैं, उसके अंदर छेद होते हैं. उन्होंने कहा कि मुर्गियों के अंडों के छिलके में लगभग 8,000 से 10,000 छोटे-छोटे छेद होते हैं, जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते. ये छेद अंडे के अंदर के भ्रूण (चूजे) के लिए सांस लेने में मदद करते हैं. इनके जरिए चूजा ऑक्सीजन लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड व अन्य गैसें बाहर निकलती हैं.

अंडों में छोटे-छोटे छेद प्राकृतिक होते हैं

एफएम शेख ने बताया कि ये छोटे-छोटे छेद प्राकृतिक होते हैं. अंडा जब नया निकलता है तब थोड़ा नरम होता है, बाद में सख्त हो जाता है, लेकिन छिद्र वैसे ही बने रहते हैं. उन्होंने कहा अगर मुर्गी के खाने में कैल्शियम कम हो, तो अंडे का छिलका  पतला या कमजोर हो जाता है और छेद आसानी से बन जाते हैं. उन्होंने बताया कि अगर छेद बड़ा या दरार जैसी हो, तो उसमें बैक्टीरिया जा सकते हैं. उनके मुताबिक, इसलिए अंडे की बाहरी सतह पर एक सुरक्षात्मक परत (क्यूटिकल/ब्लूम) होती है, जो इन छोटे छेदों के जरिए बैक्टीरिया को अंदर जाने से रोकती है.

मुर्गियों के आहार में शामिल करें ये चीज, नहीं टूटेंगे छिलके

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अंडे के छिलके का 90 फीसदी हिस्सा कैल्शियम कार्बोनेट  से बना होता है. इसलिए मुर्गियों को ऐसा चारा देना जरूरी है जिसमें पर्याप्त कैल्शियम हो, ताकि अंडे का छिलका मजबूत रहे और उसमें दरार या बड़े छेद न आएं. एफएम शेख ने कहा कि, लेयर फीड में स्टार्टर या ग्रोवर फीड की तुलना में 3-4 गुना ज्यादा कैल्शियम होना चाहिए. इसके अलावा, ऑयस्टर शेल और लाइमस्टोन चिप्स भी अच्छे कैल्शियम स्रोत हैं, जिन्हें अलग कटोरी या फीडर में मुर्गियों को दिया जा सकता है. ध्यान रहे कि सिर्फ कैल्शियम ही काफी नहीं है. मुर्गियों के शरीर में कैल्शियम का सही अवशोषण विटामिन D और अन्य पोषक तत्वों पर भी निर्भर करता है. संतुलित और उच्च गुणवत्ता वाला चारा अंडों के छिलकों को मजबूत बनाने और दरार या छेद से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है.

आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक राज्य

PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अंडा उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. 2024-25 में देश में कुल अंडा उत्पादन 149.11 अरब अंडों का अनुमान है, जो 2014-15 के 78.48 अरब अंडों से दोगुना से भी ज्यादा है. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति अंडे की उपलब्धता भी 62 से बढ़कर 106 अंडे प्रति वर्ष हो गई है. आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक राज्य है, जिसका कुल उत्पादन में 18.37 फीसदी हिस्सा है. इसके बाद तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक प्रमुख उत्पादक राज्य हैं. पिछले दस साल में अंडा उत्पादन में 7 फीसदी से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई है.

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Published: 29 Mar, 2026 | 05:12 PM
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