Farm Pond Subsidy: किसानों को जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर योजनाओं में बदलाव कर रही है. केंद्र कृषि मंत्रालय के अनुसार, फार्म पॉन्ड और सिंचाई पाइपलाइन पर मिलने वाले अनुदान के नियमों में संशोधन किया गया है. नए प्रावधानों का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराना, खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और अनुदान वितरण में अनियमितताओं को रोकना है. नए नियमों के लागू होने के बाद किसानों को पहले की तरह केवल विभाग में पंजीकृत विक्रेताओं से ही सामग्री खरीदने की बाध्यता नहीं रहेगी. अब वे किसी भी ऐसे निर्माता, अधिकृत विक्रेता या डीलर से सामग्री खरीद सकेंगे, जिसके उत्पाद भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणित हों.
बीआईएस प्रमाणित सामग्री खरीदना होगा अनिवार्य
केंद्र कृषि मंत्रालय के अनुसार, फार्म पॉन्ड की प्लास्टिक लाइनिंग शीट और सिंचाई पाइपलाइन पर अनुदान तभी मिलेगा, जब खरीदी गई सामग्री बीआईएस प्रमाणित होगी. किसानों को आवेदन के समय कुछ जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे. इन दस्तावेजों में वैध बीआईएस लाइसेंस, सीएमएल (CML) नंबर, जीएसटी बिल और उत्पाद की स्टॉक एंट्री से संबंधित रिकॉर्ड शामिल होंगे. विभाग सभी दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद ही अनुदान स्वीकृत करेगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण और मानक के अनुरूप सामग्री ही मिले.
सत्यापन के लिए डिजिटल तकनीक का होगा उपयोग
नई व्यवस्था में अनुदान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सत्यापन को भी शामिल किया गया है. केंद्र कृषि मंत्रालय के अनुसार, भौतिक सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारी BIS Care App और मानक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उत्पाद की प्रमाणिकता जांचेंगे. अधिकारी उत्पाद के सीएमएल नंबर के जरिए लाइसेंस का सत्यापन करेंगे. इससे नकली या बिना प्रमाणित उत्पादों के उपयोग पर रोक लगेगी और केवल मानक गुणवत्ता वाली सामग्री पर ही सरकारी सहायता मिल सकेगी. डिजिटल व्यवस्था से सत्यापन प्रक्रिया तेज और अधिक विश्वसनीय बनने की उम्मीद है.
जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को मिलेंगे अधिक विकल्प
केंद्र कृषि मंत्रालय का मानना है कि भूजल स्तर में गिरावट और सिंचाई की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए फार्म पॉन्ड निर्माण और पाइपलाइन आधारित सिंचाई को बढ़ावा देना जरूरी है. नए नियमों के तहत किसान अपनी पसंद के किसी भी बीआईएस प्रमाणित निर्माता, अधिकृत विक्रेता या डीलर से सामग्री खरीद सकेंगे. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को बेहतर गुणवत्ता की सामग्री उचित कीमत पर मिलने की संभावना रहेगी. अनुदान प्राप्त करने के लिए किसान को 500 रुपये के स्टांप पर तैयार अनुबंध की प्रति भी जमा करनी होगी. साथ ही खरीदे गए उत्पाद पर चालू वित्तीय वर्ष का निर्माण वर्ष अंकित होना आवश्यक होगा. मंत्रालय का मानना है कि इन बदलावों से अनुदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी, जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी और अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.