नैनो फर्टिलाइजर पर सरकार का बड़ा निर्णय जल्द, किसानों को नहीं थोपा जाएगा कोई उत्पाद

अब तक लागू ‘तीन साल की अस्थायी मंजूरी’ प्रणाली को खत्म कर सरकार नैनो-फर्टिलाइजर को स्थायी मंजूरी देने की योजना बना रही है. इसका सीधा फायदा कंपनियों और किसानों दोनों को मिलेगा—न सिर्फ बिजनेस आसान होगा, बल्कि उर्वरकों की उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर भी स्थिरता आएगी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 12 Dec, 2025 | 09:12 AM

केंद्र सरकार किसानों के लिए उपयोग किए जाने वाले नैनो उर्वरकों को लेकर बड़ा बदलाव करने जा रही है. अब तक लागू ‘तीन साल की अस्थायी मंजूरी’ प्रणाली को खत्म कर सरकार नैनो-फर्टिलाइजर को स्थायी मंजूरी देने की योजना बना रही है. इसका सीधा फायदा कंपनियों और किसानों दोनों को मिलेगान सिर्फ बिजनेस आसान होगा, बल्कि उर्वरकों की उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर भी स्थिरता आएगी. हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि स्थायी मंजूरी तभी दी जाएगी जब विशेषज्ञ सभी परीक्षण रिपोर्टों का गहन अध्ययन कर लें.

नई तकनीक को लेकर बढ़ रही स्वीकार्यता

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के सम्मेलन में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने नैनो-फर्टिलाइजर को कृषि क्षेत्र कीआधुनिक तकनीकबताया. उन्होंने कहा कि शुरुआत में किसी भी नई तकनीक को लेकर संदेह होता है, लेकिन नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के परिणाम समय के साथ किसानों को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह तकनीक भारत ही नहीं, बल्कि 25 से अधिक देशों में तेजी से अपनाई जा रही है.

स्थायी मंजूरी के लिए कंपनियों को देना होगा पूरा परीक्षण डेटा

सरकार ने सभी कंपनियों से विस्तृत परीक्षण रिपोर्ट जमा करने को कहा है, ताकि हर तीन साल में लाइसेंस नवीनीकरण की आवश्यकता खत्म हो सके.

IFFCO के नैनो यूरिया को पहले ही तीन वर्षों के लिए पुनः मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि अन्य कंपनियों के लाइसेंस जून 2026 में नवीनीकरण के लिए लंबित हैं. कृषि सचिव ने कहा कि स्थायी अनुमोदन प्रक्रिया पारदर्शी और वैज्ञानिक होगी, ताकि किसानों को केवल सुरक्षित और प्रमाणित उत्पाद ही मिले.

टैगिंगपर सरकार की सख्त चेतावनी

चतुर्वेदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कई कंपनियां नैनो उर्वरक या बायो-स्टिमुलेंट को सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ जबरनटैगकर बेचने की कोशिश करती हैं. उन्होंने कहा कि इससे किसान भ्रमित होते हैं और अच्छी तकनीक पर भी अविश्वास बढ़ता है.

सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी उत्पाद को किसानों पर थोपना पूरी तरह प्रतिबंधित है. कंपनियों को किसानों को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने होंगे.

गलतफहमी भी बन जाती है शिकायत

IFFCO के एमडी के.जे. पटेल ने कहा कि कंपनी द्वारा टैगिंग पर स्पष्ट रोक है. कई बार विक्रेता किसान को किसी अन्य उत्पाद की सलाह देता है, जिसेजबरन बेचनेके रूप में गलत समझ लिया जाता है. उन्होंने कहा कि किसानों में जागरूकता की कमी भी इस गलतफहमी का एक कारण है.

ICAR का 5 वर्ष का अध्ययन

कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने संसद में बताया कि ICAR ने नैनो यूरिया के दीर्घकालिक प्रभावों का पता लगाने के लिए 5 वर्ष का देशव्यापी अध्ययन शुरू किया है.

यह अध्ययन 15 करोड़ रुपये की लागत से जारी है, जिसमें मिट्टी, फसल उत्पादकता और गुणवत्ता पर प्रभाव का मूल्यांकन किया जा रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों ने अध्ययन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि इसे आंशिक रूप से उत्पादक कंपनियां वित्तीय सहयोग दे रही हैं.

नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह की रिपोर्टें

कई कृषि विश्वविद्यालयों की रिपोर्टों में नैनो यूरिया के उपयोग से उपज में कमी सामने आई है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (रायपुर), विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान(अल्मोड़ा), इन संस्थानों ने कई फसलों में उत्पादकता और गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की.

दूसरी ओर, देश के कई अन्य स्थानों पर बेहद अच्छे परिणाम मिले हैं, हैदराबाद, करनाल, बेंगलुरु, जोबनेर, कल्याणी, यहां दो बार फोलियर स्प्रे करने पर अनाज और तिलहन की उपज में 5–15% तक वृद्धि दर्ज की गई.

वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद ही स्थायी मंजूरी

सरकार का कहना है कि नैनो उर्वरक भविष्य की तकनीक है, लेकिन स्थायी मंजूरी तभी दी जाएगी जब इसके सभी वैज्ञानिक परीक्षणों के परिणाम स्पष्ट, सुरक्षित और सकारात्मक साबित हों.

किसानों को उम्मीद है कि यदि नैनो उर्वरक का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी साबित होता है, तो इससे उनकी लागत घटेगी और उपज में वृद्धि होगी, जिससे कृषि और लाभदायक बन सकेगी.

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