हरियाणा एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड ने अधिकारी को सेवा से किया बर्खास्त, ये है वजह

HSAMB के सचिव द्वारा 30 अप्रैल को जारी बर्खास्तगी आदेश में कहा गया कि 14 मार्च को गिरफ्तारी के बाद राजेश सांगवान से पूछताछ की गई. जांच में सामने आया कि इस मामले में उनकी भूमिका उनके कंट्रोलर, फाइनेंस और अकाउंट्स पद से जुड़ी थी और वे बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी थे.

Kisan India
नोएडा | Published: 2 May, 2026 | 09:24 PM

Haryana News: हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB) ने फाइनेंस और अकाउंट्स कंट्रोलर राजेश सांगवान को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी लेन-देन जैसे आरोप लगे हैं. पिछले आठ दिनों में यह तीसरा मामला है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत बिना विभागीय जांच के ही अधिकारी को नौकरी से हटाया गया है.

HSAMB के सचिव द्वारा 30 अप्रैल को जारी बर्खास्तगी आदेश में कहा गया कि 14 मार्च को गिरफ्तारी के बाद राजेश सांगवान से पूछताछ की गई. जांच में सामने आया कि इस मामले में उनकी भूमिका उनके कंट्रोलर, फाइनेंस और अकाउंट्स  पद से जुड़ी थी और वे बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी थे. आदेश में कहा गया कि राजेश सांगवान सीधे तौर पर IDFC फर्स्ट बैंक में खाता खोलने के प्रस्ताव को तैयार करने और उसे आगे मंजूरी के लिए भेजने में शामिल थे. उन्होंने मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था के बावजूद अन्य बैंकों से नए कोटेशन लिए बिना ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.

वित्तीय निगरानी व्यवस्था का हिस्सा भी रहे

मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने खाता खोलने की प्रक्रिया में मदद की और वित्तीय निगरानी व्यवस्था  का हिस्सा भी रहे, जिसमें रिकन्सिलिएशन रिपोर्ट प्राप्त करना शामिल था. वे खाते से जुड़े वित्तीय लेन-देन की सही जांच करने के लिए जिम्मेदार थे. आदेश में कहा गया कि धोखाधड़ी तक पहुंचने वाली घटनाओं में उनकी ओर से कई प्रक्रियागत लापरवाही और नियंत्रण की कमी पाई गई. उन्होंने रद्द किए गए चेक (चेक नंबर 6) की निगरानी नहीं की, जो बाद में दुरुपयोग किया गया. उन्होंने स्वीकार किया कि रद्द होने के बाद भी उन्होंने उसकी स्थिति की जांच नहीं की.

इसके अलावा, उन्होंने एक बैठक के दौरान एक बाहरी व्यक्ति (आरोपी ऋभव ऋषि) को चेकबुक ले जाने दिया और यह सुनिश्चित नहीं किया कि वह वापस लौटाई जाए. आदेश में आगे कहा गया कि जांच के दौरान मिले सबूतों से पता चला कि राजेश सांगवान लगातार और जानबूझकर आरोपी बैंक अधिकारियों और अन्य साजिशकर्ताओं के संपर्क में बने रहे.

इसलिए की गई कार्रवाई

आरोप है कि उन्होंने अवैध लाभ (रिश्वत) भी लिया, जिसके बदले में उन्होंने फर्जी वित्तीय लेन-देन को आसान बनाने और उसे आगे बढ़ाने में मदद की. आदेश में कहा गया कि इस बात में कोई शक नहीं है कि राजेश सांगवान ने ऐसा व्यवहार किया जो एक सरकारी कर्मचारी से बिल्कुल भी अपेक्षित नहीं था. उन्होंने गंभीर अनुशासनहीनता की है, जिससे HSAMB और राज्य सरकार की छवि आम जनता के बीच खराब हुई है. आदेश में यह भी कहा गया कि अगर उन्हें सेवा में बनाए रखा जाता, तो यह सार्वजनिक हित और विभागीय अनुशासन दोनों के लिए नुकसानदायक होता. इसलिए उन्हें सेवा से हटाना जरूरी माना गया.

10 करोड़ रुपये की एक फर्जी लेन-देन की

जांच में सामने आया कि 14 जनवरी 2026 को चेक नंबर 000006 के जरिए 10 करोड़ रुपये की एक फर्जी लेन-देन की गई थी. यह रकम बाद में दो RTGS ट्रांसफर में बांटी गई- 9.75 करोड़ रुपये SRR Planning Gurus Pvt Ltd को और 25 लाख रुपये Mannat Contractors को भेजे गए. राजेश सांगवान इस खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे, इसलिए इस पूरे मामले में उनकी सीधी जिम्मेदारी मानी जा रही है. जांच में यह भी पता चला कि इस ट्रांजैक्शन की कॉल कन्फर्मेशन IDFC फर्स्ट बैंक की कर्मचारी और सह-आरोपी सीमा धीमान ने कथित तौर पर सांगवान को की थी.

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