Opinion: हाई वैल्यू क्रॉप को आम बजट में प्राथमिकता, हाईटेक एग्रीकल्चर में कहीं चूक न जाएं छोटे किसान

इस बार के बजट में परंपरागत फसलों की जगह हाई वैल्यू क्रॉप अथवा अधिक मूल्य देने वाली फसलों को प्राथमिकता दी गई है. वैश्विक बाजार में कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर अपनी पैठ मजबूत बनाने की दिशा में पहल की गई है. इसके लिए कृषि क्षेत्र को हाईटेक करने की जरूरत पर बल दिया गया है.

सुरेंद्र प्रसाद सिंह
नई दिल्ली | Updated On: 12 Feb, 2026 | 05:45 PM

सुरेन्द्र प्रसाद सिंह। आम बजट में छोटे किसानों को हाशिए पर रख दिया गया. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को महफूज रखने वाले राज्यों के किसानों के बारे में आम बजट में बहुत कुछ नहीं दिया गया है. फूड बास्केट कहे जाने वाले उत्तरी राज्यों में खाद्यान्न उत्पादन के लिए कुछ खास नहीं है. जबकि गेहूं, चावल, चीनी और मोटे अनाज की उम्दा खेती करने के लिए कोई प्रोत्साहन राशि आवंटित नहीं की गई है. इसके मुकाबले आम बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में कैश क्रॉप और हाई वैल्यू क्रॉप को विशेष प्रावधान किया है. इसके लिए एग्रीकल्चर को हाई टेक बनाने में जोर दिया गया है. सरकार के बजटीय प्रावधानों में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में की जाने वाली परंपरागत फसलों को तरजीह नहीं दी गई है.

वैश्विक बाजार में कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर पैठ बनाने की पहल

हाई वैल्यू क्रॉप वाली कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए आम बजट में विशेष प्रावधान किया गया है. उत्पादन बढ़ाने के लिए उत्पादकता पर विशेष जोर दिया गया है. वैसे कहने को तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए उसके आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है. लेकिन इसका बड़ा हिस्सा नगदी के रूप में किसानों को पीएम-किसान के तहत वितरित कर दिया जाएगा. इस बार के बजट परंपरागत फसलों की जगह हाई वैल्यू क्रॉप अथवा अधिक मूल्य देने वाली फसलों को प्राथमिकता दी गई है. वैश्विक बाजार में कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर अपनी पैठ मजबूत बनाने की दिशा में पहल की गई है. इसके लिए कृषि क्षेत्र को हाईटेक करने की जरूरत पर बल दिया गया है.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संसद में पेश आम बजट में कृषि क्षेत्र को अलग नजरिए से देखने की कोशिश की गई है. फूड बाऊल कहे जाने वाले उत्तरी क्षेत्र के सीमित राज्यों के साथ इस बार पूरे देश की विविधापूर्ण फसलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है. हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम और समूचे पूर्वोत्तर राज्यों की खेती को विशेष प्राथमिकता दी गई है. इन राज्यें में हार्टिकल्चर और फ्लोरिकल्चर जैसी फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं. आम बजट में इन राज्यों में विविधापूर्ण फलों और फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया गया है. इन पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में ‘अगर’ (Agar) के पेड़ों और पहाड़ी क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और चिलगोजा (pine nuts) के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा.

यहां के फल और फूलों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए लाजिस्टिक सुविधाएं मुहैया कराने को बढ़ावा दिया गया है. ताजे फलों की प्रोसेसिंग के लिए स्थानीय स्तर पर लघु उद्योग लगाने पर बल दिया गया है. हिमालयी राज्यों में उच्च गुणवत्ता वाले ड्राईफ्रूट्स की घरेलू बाजारों में बहुत मांग है. यहां के किसानों के हितों के मद्देनजर आम बजट में कई प्रावधान किए गये हैं. बजट के इन प्रावधानों से कठिन परिस्थितियों में खेती करने वाले इन राज्यों के किसानों को बहुत लाभ होगा. हिमालयी राज्यों में फ्लोरिकल्चर की बाढ़ आ सकती है. यहां से वैश्विक गुणवत्ता वाले फूलों के निर्यात की संभावना बढ़ गई है, जिसके लिए आम बजट में प्रावधान किया गया है. पूर्वोत्तर के राज्यों से फूलों का निर्यात बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरु की जाएंगी. इसके लिए इन राज्यों में छोटे हवाई अड्डे बनाए जाएंगे.

हार्टिकल्चर फसलों की खेती वाले पश्चिमी राज्यों पर फोकस

आम बजट में पश्चिमी राज्यों को भी टार्गेट किया गया है, जहां हार्टिकल्चर फसलों की खेती होती है. महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके. अंगूर उत्पादन में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है. इसी तरह अनार और अन्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास होंगे. यहां हार्टिकल्चर उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित करने और निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी.

आम बजट में बहुत वर्षों बाद दक्षिणी राज्यों की कैश क्रॉप को शामिल करते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है. नारियल उत्पादन में भारत दुनिया में सबसे आगे है. लेकिन प्रोसेसिंग के मामले में बुनियादी ढांचे के अभाव है, जिसे विकसित करने के लिए आम बजट में प्रावधान किया गया है. वित्त मंत्री सीतारमण ने कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग पर विशेष ध्यान दिया है. इनमें समुद्र तटीय क्षेत्र खास हैं, जहां नारियल, चंदन, कोको और काजू की खेती होती है. नीली अर्थव्यवस्था को गति पकड़ाने के लिए तटीय क्षेत्रों में ‘फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस’ (FFPOs) को विकसित का जाएगा. इसके साथ उन्हें बाजार संपर्क योजना से लाभ पहुंचाया जाएगा. किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए 5,000 से अधिक एग्री-टेक स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जाएगा. इससे किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जाएगा.

हाईटेक एग्री के उपाय

आम बजट में कृषि क्षेत्र को हाईटेक बनाने के लिए भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) की पहल की गई है. इसके तहत Agri-Stack और AI को प्रोत्साहन दिया गया है. इसके तहत ‘एग्री-स्टैक’ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़ा गया है. इससे किसानों को उनकी अपनी भाषा में खेती, मौसम और बाजार की सटीक व सही जानकारी AI के माध्यम से मिलेगी. ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में तकनीक को शामिल किया गया है ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो. वैश्विक स्तर पर केमिकल मुक्त कृषि उत्पादों की मांग अधिक है. इसके लिए आम बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट आवंटन में वृद्धि की गई है. सिंचित रकबा बढ़ाने के लिए जलाशयों का निर्माण करने और अन्य हाईटेक को अपनाने पर बल दिया गया है.
– लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 12 Feb, 2026 | 05:11 PM

कच्चे आम का खट्टापन किस कारण होता है?