CWC reservoir storage report: देश के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घटता जा रहा है, जिससे आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ने लगी है. ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में इस सप्ताह जल भंडारण और कम हो गया है. सबसे ज्यादा चिंता की स्थिति दक्षिण भारत में है, जहां कई राज्यों के बांधों में पानी का स्तर 50 प्रतिशत से नीचे चला गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि साल की शुरुआत से ही देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश कम हुई है, जिसका असर अब जलाशयों के जल स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है. खेती, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है.
166 जलाशयों में 56.73 प्रतिशत ही बचा पानी
सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) द्वारा जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण अब 104.133 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) रह गया है. इन जलाशयों की कुल क्षमता 183.565 BCM है, जिसके मुकाबले वर्तमान स्तर 56.73 प्रतिशत है.
हालांकि यह स्तर पिछले साल की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक और सामान्य औसत से 27 प्रतिशत ज्यादा बताया गया है, लेकिन लगातार घटता जल स्तर चिंता का विषय बना हुआ है.
दक्षिण भारत के जलाशयों की स्थिति सबसे कमजोर
रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत के जलाशयों की स्थिति सबसे कमजोर है. इस क्षेत्र के 47 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर केवल 47.66 प्रतिशत रह गया है. इन जलाशयों की कुल क्षमता 55.288 BCM है, जबकि मौजूदा जल भंडारण 26.350 BCM है.
राज्यों के स्तर पर देखें तो तेलंगाना के जलाशयों में पानी का स्तर लगभग 40 प्रतिशत तक गिर गया है. वहीं कर्नाटक और केरल में भी जलाशयों का स्तर 50 प्रतिशत से नीचे दर्ज किया गया है. हालांकि तमिलनाडु में जलाशयों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और वहां पानी का स्तर 50 प्रतिशत से अधिक है.
उत्तर भारत के जलाशयों में मध्यम स्तर
उत्तर भारत के 11 प्रमुख जलाशयों में कुल भंडारण 10.237 BCM दर्ज किया गया है, जो कुल क्षमता 19.836 BCM का लगभग 51.6 प्रतिशत है. राज्यों की स्थिति देखें तो हिमाचल प्रदेश में जलाशयों का स्तर लगभग 45 प्रतिशत है, जबकि पंजाब और राजस्थान में यह 60 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है. हालांकि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होने पर यहां भी जल स्तर में गिरावट आ सकती है.
पूर्वी राज्यों में भी स्थिति चिंता जनक
पूर्वी भारत के 27 जलाशयों में कुल जल भंडारण 11.975 BCM दर्ज किया गया है, जो कुल क्षमता 21.759 BCM का लगभग 55 प्रतिशत है. यहां भी कई राज्यों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. असम में जलाशयों का स्तर केवल 19 प्रतिशत है, जबकि पश्चिम बंगाल में 34 प्रतिशत, मिजोरम में 37 प्रतिशत और बिहार में 39 प्रतिशत दर्ज किया गया है. हालांकि मेघालय में स्थिति बेहतर है और वहां का एकमात्र जलाशय 95 प्रतिशत तक भरा हुआ है. वहीं झारखंड में जल स्तर लगभग 63 प्रतिशत बताया गया है.
मध्य भारत में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति
मध्य भारत के 28 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण 30.121 BCM दर्ज किया गया है, जो कुल क्षमता 48.588 BCM का लगभग 62 प्रतिशत है. यहां छत्तीसगढ़ के बांधों में पानी का स्तर 76 प्रतिशत है, जो सबसे बेहतर स्थिति में है. वहीं मध्य प्रदेश में जलाशयों का स्तर 64 प्रतिशत दर्ज किया गया है. उत्तर प्रदेश 53 प्रतिशत और उत्तराखंड में 50 प्रतिशत जल स्तर है.
पश्चिमी भारत के जलाशयों में 67 प्रतिशत पानी
पश्चिमी क्षेत्र के 53 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण 25.450 BCM है, जो कुल क्षमता 38.094 BCM का लगभग 67 प्रतिशत है. इस क्षेत्र के गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों का स्तर लगभग 65 से 70 प्रतिशत के बीच बना हुआ है, जो देश के अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाता है.
बारिश की कमी बनी बड़ी वजह
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मार्च की शुरुआत से अब तक देश के 719 जिलों के आंकड़ों में पाया गया है कि 91 प्रतिशत जिलों में 1 मार्च के बाद कोई बारिश नहीं हुई है.
इसके अलावा जनवरी और फरवरी के दौरान देश के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सों में सामान्य से कम या बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई. यही वजह है कि कई जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है.
आने वाले दिनों में और घट सकता है जल स्तर
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो सप्ताह तक देश में कहीं भी बड़े पैमाने पर बारिश होने की संभावना नहीं है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले दिनों में जलाशयों का जल स्तर और घट सकता है.
इसका असर खासतौर पर गर्मियों के दौरान पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है. इसलिए जल संसाधन प्रबंधन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.