बढ़ते बाजार मूल्य ने बढ़ाया किसानों का भरोसा, मिर्च की खेती का रकबा 30 फीसदी तक बढ़ने के आसार

Red Chilli Cultivation: मिर्च के बढ़ते दाम और बाजार में पुराने स्टॉक की कमी के कारण किसान इस बार फिर बड़े पैमाने पर मिर्च की खेती की ओर लौट रहे हैं. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में मिर्च की बुवाई बढ़ने की उम्मीद है. बीजों की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इस साल मिर्च का रकबा काफी बढ़ सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 25 Jun, 2026 | 12:29 PM

Chilli Farming: देश में खरीफ सीजन 2026 के दौरान मिर्च की खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद है. पिछले साल कम कीमतों और ज्यादा उत्पादन के कारण कई किसानों ने मिर्च की खेती से दूरी बना ली थी, लेकिन इस बार हालात बदलते नजर आ रहे हैं. बाजार में मिर्च के अच्छे दाम मिल रहे हैं और पुराना स्टॉक भी कम बचा है. ऐसे में किसान फिर से मिर्च की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि, इस साल मिर्च का क्षेत्रफल 2024-25 के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसान बड़े पैमाने पर मिर्च की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं.

अच्छे दामों ने बढ़ाया किसानों का भरोसा

पिछले साल मिर्च की फसल खूब हुई थी, जिसके कारण बाजार में दाम काफी गिर गए थे. इससे किसानों को अच्छा फायदा नहीं मिल पाया और कई किसानों ने मिर्च की जगह दूसरी फसलें बोना शुरू कर दिया था. लेकिन इस बार हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात होने वाली मिर्च की किस्मों, जैसे तेजा और अरमूर, के दाम करीब 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं. वहीं घरेलू बाजार में इस्तेमाल होने वाली मिर्च के भाव भी करीब 20 फीसदी बढ़े हैं. अच्छे दाम मिलने की उम्मीद से किसानों का उत्साह बढ़ा है और वे मिर्च की खेती में फिर से रुचि दिखा रहे हैं.

पुराने स्टॉक की कमी भी बनी वजह

मिर्च के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह बाजार में पुराना स्टॉक कम होना भी है. पिछले साल के मुकाबले इस बार गोदामों में मिर्च का भंडार काफी कम बचा है. अभी करीब 1.46 करोड़ बोरियां ही स्टॉक में हैं, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 2.29 करोड़ बोरियों के आसपास था. बाजार में माल कम होने की वजह से मांग बनी हुई है और कीमतों को भी अच्छा सहारा मिल रहा है.

बीजों की बिक्री से मिल रहे संकेत

मिर्च की खेती बढ़ने के संकेत अब बीजों की बिक्री में भी दिखाई देने लगे हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल मिर्च के बीजों की मांग अच्छी तरह बढ़ी है और कई बड़ी कंपनियों के बीजों की बिक्री में 10 से 12 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में मिर्च के बीजों की मांग ज्यादा देखने को मिल रही है. अच्छे दाम मिलने की उम्मीद के चलते किसान मिर्च की खेती की ओर फिर से रुख कर रहे हैं. जानकारों का अनुमान है कि इस सीजन में मिर्च का रकबा करीब 30 फीसदी तक बढ़ सकता है.

कर्नाटक में भी बढ़ी किसानों की रुचि

उत्तरी कर्नाटक के कई किसान इस बार कपास की बजाय मिर्च की खेती को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. खासकर ब्यादगी मिर्च उगाने वाले इलाकों में किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है. हालांकि इस साल बारिश में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन मिर्च के अच्छे भाव किसानों को आकर्षित कर रहे हैं. ब्यादगी मिर्च की कुछ किस्में बाजार में 600 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं. यही वजह है कि किसान इस फसल से अच्छी कमाई की उम्मीद कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर इसकी खेती की तैयारी कर रहे हैं.

नई फसल आने में हो सकती है देरी

इस बार कई इलाकों में मॉनसून देर से पहुंचा है, जिसका असर मिर्च की बुवाई और नई फसल की आवक पर पड़ सकता है. आमतौर पर जो नई मिर्च की फसल नवंबर में मंडियों में पहुंच जाती है, उसके इस बार दिसंबर तक आने की संभावना बताई जा रही है. हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मिर्च ऐसी फसल है, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकती है. इसलिए मौसम में उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को इस साल अच्छी उपज और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है.

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