उर्वरक आपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर बड़ी कार्रवाई, 7 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

पंजाब सरकार ने नीम-कोटेड यूरिया और तकनीकी ग्रेड यूरिया की खरीद में कथित गड़बड़ियों को लेकर सात अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जबकि एक अधिकारी का तबादला किया गया है. मामले में जीएसटी और वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच चल रही है. सरकार ने भविष्य में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए MARKFED को नोडल एजेंसी बनाने का फैसला किया है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 29 Jun, 2026 | 12:59 PM

Punjab News: पंजाब सरकार ने कृषि क्षेत्र में उर्वरक आपूर्ति में कथित गड़बड़ियों को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. सरकार ने सात वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जबकि एक अन्य अधिकारी का तबादला कर दिया गया है. मामला कृषि उपयोग के लिए सब्सिडी वाली नीम-कोटेड यूरिया की जगह तकनीकी ग्रेड यूरिया की खरीद और आपूर्ति से जुड़ा बताया जा रहा है.

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, उर्वरकों की आपूर्ति में गड़बड़ी और गलत वर्गीकरण की शिकायतें मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने तुरंत जांच के आदेश दिए थे. विभाग के प्रशासनिक सचिव ने मार्कफेड और मिल्कफेड के प्रबंध निदेशकों को तथ्यात्मक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे. इसके बाद 25 जून को विभाग ने तकनीकी ग्रेड यूरिया की खरीद और आपूर्ति से जुड़े महाप्रबंधकों और अन्य अधिकारियों के खिलाफ बड़ी सजा से संबंधित विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी किया.

बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के बाद MILKFED ने कई अधिकारियों के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है. इनमें खन्ना कैटल फीड प्लांट के महाप्रबंधक, प्रबंधक (पशुपालन) एवं गुणवत्ता प्रभारी, उप प्रबंधक (खरीद एवं भंडार) तथा वित्त एवं लेखा प्रभारी और एक वरिष्ठ सहायक को चार्जशीट जारी की गई है. वहीं, MARKFED ने भी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है. मुख्य प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि महाप्रबंधक, वरिष्ठ लेखा अधिकारी (अतिरिक्त रूप से उप मुख्य लेखा अधिकारी का कार्यभार संभाल रहे) और एक वरिष्ठ सहायक (वाणिज्यिक प्रबंधक के रूप में कार्यरत) को सेवा नियमों के तहत चार्जशीट दी गई है.

वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए उठाया गया यह कदम

मामले में कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए वाणिज्यिक प्रबंधक के रूप में कार्यरत एक वरिष्ठ सहायक का प्रशासनिक आधार पर तबादला भी कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम संभावित जीएसटी गड़बड़ियों  और वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए उठाया गया है. साथ ही, कराधान विभाग को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत कर अधिकारियों ने गिद्दड़बाहा स्थित एम/एस इंडो ऑर्गेनिक कंपनी के परिसर का निरीक्षण किया और कंपनी से खातों की पुस्तकों तथा अन्य संबंधित दस्तावेज जांच के लिए पेश करने को कहा है.

एएम केमिकल की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जांच के दौरान नई दिल्ली की मनीषा ट्रेडिंग कंपनी और हरियाणा के सोनीपत स्थित एएम केमिकल की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है. इन कंपनियों ने जिस सामग्री को तकनीकी ग्रेड यूरिया बताकर आपूर्ति की थी, शुरुआती जांच में उसके नीम-कोटेड यूरिया होने की आशंका जताई गई है. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह जीएसटी दस्तावेजों में गलत जानकारी देने, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने और किसानों के लिए सब्सिडी वाले उर्वरक के संभावित दुरुपयोग का मामला बन सकता है.

अब होगी कानूनी कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए नई दिल्ली और पंचकूला स्थित केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग के प्रधान आयुक्तों को भेज दिया गया है. वहीं, भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत MARKFED को राज्य में तकनीकी ग्रेड यूरिया की खरीद और आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी बनाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से तकनीकी ग्रेड यूरिया की खरीद सीधे भारत सरकार की एजेंसियों या अधिकृत संस्थाओं से की जा सकेगी. इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, उर्वरक की गुणवत्ता  पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और राज्य की सहकारी संस्थाओं तक आपूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी और सुचारु बनेगी.

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Published: 29 Jun, 2026 | 12:23 PM

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