देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और धांधली के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई. जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच लिए गए इस फैसले को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक माफिया के खिलाफ सजा और जुर्माने को पहले से अधिक कठोर बनाया गया है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लाखों छात्रों का भरोसा बहाल करना और संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करना है.
पेपर लीक माफिया पर सबसे सख्त प्रहार
संशोधन विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह पेपर लीक या परीक्षा में धांधली का दोषी पाया जाता है, तो उसे अधिकतम 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है. सरकार का मानना है कि पेपर लीक केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. इसी वजह से कानून को और अधिक प्रभावी बनाने का फैसला लिया गया है, ताकि ऐसे अपराधों पर कड़ा संदेश जाए.
News Alert! Union Cabinet approves draft bill to provide stricter punishments for paper leaks: Sources pic.twitter.com/lgQTXZ8prJ
और पढ़ें— Press Trust of India (@PTI_News) July 24, 2026
फास्ट-ट्रैक कोर्ट करेंगे त्वरित सुनवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर सकते हैं. नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा. इन अदालतों को ऐसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिले और न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो. इस संशोधन के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को नोडल मंत्रालय बनाया गया है.
मौजूदा कानून से कितना अलग होगा नया प्रावधान?
फिलहाल सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू है. मौजूदा कानून में व्यक्तिगत स्तर पर पेपर लीक या परीक्षा में अनियमितता के दोषी को 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. वहीं, परीक्षा से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर की संलिप्तता साबित होने पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में 5 से 10 साल की कैद और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माना पहले से निर्धारित है. अब संशोधन के बाद दंड और कानूनी प्रक्रिया दोनों को और अधिक सख्त बनाया जाएगा.
पीएम मोदी बोले- पेपर लीक छोटी समस्या नहीं, युवाओं के भविष्य पर हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के सपनों को प्रभावित करती हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक के मामलों के बाद लगातार कानून को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य दोषियों के खिलाफ तेज, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे और देश के युवाओं का भरोसा फिर से मजबूत हो.