Odisha fertiliser stock: खरीफ फसलों के मौसम से पहले देशभर में खाद की उपलब्धता एक अहम मुद्दा बन जाती है. ऐसे समय में ओडिशा सरकार ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उर्वरक उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हालात की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना न करना पड़े.
खरीफ सीजन से पहले सरकार की सक्रियता
भुवनेश्वर में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की. उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन बहुत महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान किसानों को समय पर खाद मिलना जरूरी है.
सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खाद किसानों तक उनकी जरूरत के अनुसार और उचित कीमत पर पहुंचनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतिम किसान तक खाद की आपूर्ति सही तरीके से हो.
राज्य में खाद का मौजूदा स्टॉक
सरकार के अनुसार, ओडिशा में इस समय 1.77 लाख टन यूरिया और 60 हजार टन से ज्यादा डीएपी (DAP) का भंडार उपलब्ध है. यह आंकड़े राहत देने वाले हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सिर्फ स्टॉक होना काफी नहीं है. जरूरी यह है कि यह खाद समय पर और सही जगह पर किसानों तक पहुंचे.
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती
बैठक में मुख्यमंत्री ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि थोक और खुदरा विक्रेताओं के गोदामों की नियमित जांच की जाए. अगर कहीं भी अवैध भंडारण या गड़बड़ी पाई जाती है, तो तुरंत FIR दर्ज की जाए और संबंधित लाइसेंस रद्द किए जाएं. सरकार का साफ संदेश है कि किसानों के हक से कोई भी समझौता नहीं होगा.
सीमा पर निगरानी और तस्करी पर रोक
उर्वरकों की तस्करी रोकने के लिए भी सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री ने पुलिस और कृषि विभाग को मिलकर बॉर्डर चेकपोस्ट पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि हर संदिग्ध वाहन की जांच की जाए, क्योंकि कई बार सब्सिडी वाला यूरिया खेती की बजाय उद्योगों में इस्तेमाल के लिए भेज दिया जाता है. इस पर रोक लगाना बेहद जरूरी है.
पंचायत स्तर पर निगरानी समितियां
सरकार ने खाद वितरण को बेहतर बनाने के लिए हर ग्राम पंचायत में ‘निगरानी समितियां’ बनाने का फैसला किया है. अब तक 6,794 पंचायतों में से 6,229 में समितियां बन चुकी हैं. बाकी 565 पंचायतों में भी अगले 2-3 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं. इन समितियों का काम होगा कि गांव स्तर पर खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जाए.
डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार अब खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल सिस्टम को भी बढ़ावा दे रही है. राज्य में करीब 44 लाख किसानों में से 15 लाख को अब तक डिजिटल किसान आईडी मिल चुकी है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया को मिशन मोड में पूरा किया जाए, ताकि सभी किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके.
संतुलित उपयोग पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों को केवल रासायनिक खाद पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्होंने जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि किसान संतुलित खाद उपयोग करें और जैविक खाद तथा नैनो यूरिया जैसे विकल्पों को अपनाएं. इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और खेती टिकाऊ बनेगी.
पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था
सीएम ने सभी खाद बिक्री केंद्रों को निर्देश दिया कि वहां स्टॉक और कीमत की जानकारी साफ-साफ प्रदर्शित की जाए. यह जानकारी बड़े अक्षरों में स्थानीय भाषा ओडिया में लिखी जाए, ताकि किसान आसानी से समझ सकें. साथ ही, सब-डिवीजन स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर भी यह जानकारी दिखाई जाएगी.
केंद्र और राज्य का तालमेल
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने कहा कि केंद्र सरकार समय-समय पर खाद उपलब्धता को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर रही है, जिनका पालन जरूरी है. वहीं, सहकारिता मंत्री प्रदीप बल सामंत ने अधिकारियों को वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाने की सलाह दी.