पंंजाब में बारिश से 20 फीसदी तक गेहूं चौपट, गन्ना किसानों की बढ़ी परेशानी.. IMD ने जारी किया अलर्ट

पंजाब के कृषि निदेशक गुरजीत सिंह ब्रार और पीएयू निदेशक डॉ. एमएस भुल्लर ने कहा है कि कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की टीमों को नुकसान का आकलन करने के लिए भेजा गया है. सर्वे रिपोर्ट आने के बाद किसानों को मुआवजा मिलेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Apr, 2026 | 12:20 PM

Punjab News: पंजाब के किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले साल बाढ़ से खरीफ फसल बर्बादी का दर्द अभी कम नहीं हुआ था कि अब बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने परेशानी बढ़ा दी है. पिछले महीने से रूक-रूक कर हो रही बारिश से रबी फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. 20 फीसदी तक गेहूं की फसल चौपट हो गई है. इसी बीच इस हफ्ते फिर से लगाताक दूसरी बार पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना बन रही है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पश्चिमी विक्षोभ की संभावना 3-4 अप्रैल को है. इसके बाद दूसरा 7-9 अप्रैल के बीच आ सकता है. इस दौरान बारिश और ओलावृष्टि भी हो सकती है. ऐसे में गेहूं की पैदावार पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है.

राज्य में गेहूं का रकबा करीब 34 लाख हेक्टेयर है. गेहूं किसान संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं. वहीं गन्ना किसान  इस साल गन्ने की कम उपज से परेशान हैं. 30  से 31 मार्च की बारिश और तूफानों ने मलवा क्षेत्र में व्यापक नुकसान किया. अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा, बर्नाला, तरनतारन, फाजिल्का, मंसा, संगरूर, होशियारपुर और गुरदासपुर से तेज हवाओं, ओलावृष्टि और बारिश से फसलें गिरने की खबरें मिली हैं.

वहीं, भारतीय किसान मजदूर यूनियन (मालवा) के नेता हीरा सिंह ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि बारिश से गेहूं की फसल के साथ-साथ सरसों को भी नुकसान पहुंचा है. वहीं, मौसम विभाग ने फिर से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई है. ऐसे में किसानों की टेंशन बढ़ गई है. अगर इसी तरह हर हफ्ते बारिश का दौर जारी रहा, तो गेहूं कटाई में देरी हो होगी. ऐसे में किसानों को खरीफ फसलों की खेती पर भी असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि बारिश और ओलावृष्टि से करीब 20 फीसदी तक फसलों को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि सरकार को फसल नुकसान के एवज में मुआवजा देना चाहिए.

नुकसान का किया जा रहा है आकलन

पंजाब के कृषि निदेशक गुरजीत सिंह ब्रार और पीएयू निदेशक एक्सटेंशन डॉ. एमएस भुल्लर ने द ट्रिब्यून से कहा कि कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की टीमों को नुकसान का आकलन  करने के लिए भेजा गया है. इस बीच, बागवानी विभाग के उप निदेशक संदीप ग्रेवाल ने कहा कि कुछ सीमित जगहों को छोड़कर, फल और सब्जियों की फसलें अब तक ज्यादा नुकसान नहीं झेल रही हैं.

35,000 एकड़ गेहूं की फसल प्रभावित

जलवायु परिवर्तन और कृषि मौसम विज्ञान विभाग की प्रमुख पवनीत कौर किंगरा ने किसानों को मौजूदा परिस्थितियों में खेतों की सिंचाई नहीं करने की सलाह दी. मुक्तसर जिले में मुख्य कृषि अधिकारी जगसिर सिंह के अनुसार, करीब 35,000 एकड़ गेहूं की फसल प्रभावित  हुई है, जिसमें 50 से 75 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है. इसमें मालोट ब्लॉक के लगभग 7,000 एकड़, गिद्दड़बाहा के 500 एकड़, मुक्तसर ब्लॉक के 10,000 एकड़ और लांबी के करीब 17,500 एकड़ शामिल हैं.

राज्य में 1 अप्रैल से हो रही गेहूं की खरीदी

गेहूं खरीदी का सीजन आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल से शुरू हुआ और राज्य सरकार ने कहा कि सभी तैयारियां पूरी हैं, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके. 1,897 से अधिक खरीदी केंद्र अधिसूचित किए गए हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है.

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Published: 3 Apr, 2026 | 12:16 PM
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