MSP से किसानों को राहत, चावल की सरकारी खरीद 463 लाख टन पहुंची… मार्च ने बदली पूरी तस्वीर

अगर पूरे सीजन को देखें तो फरवरी का महीना थोड़ा कमजोर रहा. इस दौरान चावल खरीद करीब 17 प्रतिशत तक गिर गई थी. लेकिन मार्च आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई. मार्च में खरीद अचानक करीब 10 गुना तक बढ़ गई और 21 लाख टन से ज्यादा चावल खरीदा गया, जबकि पिछले साल इसी समय करीब 2 लाख टन ही खरीद हुई थी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 3 Apr, 2026 | 08:24 AM

India rice procurement: इस साल चावल खरीद को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, वह काफी दिलचस्प है. शुरुआत में धीमी रफ्तार से चल रही सरकारी खरीद ने आखिर में जोर पकड़ा और कुल मिलाकर पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन किया. अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच सरकार ने किसानों से 463.06 लाख टन चावल खरीदा, जो पिछले साल के 454.36 लाख टन से करीब 6 प्रतिशत ज्यादा है. यह बढ़ोतरी बताती है कि किसानों की उपज का बड़ा हिस्सा इस बार सरकारी भंडार में पहुंचा है.

फरवरी में सुस्ती, मार्च में जबरदस्त उछाल

अगर पूरे सीजन को देखें तो फरवरी का महीना थोड़ा कमजोर रहा. इस दौरान चावल खरीद करीब 17 प्रतिशत तक गिर गई थी. लेकिन मार्च आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई. मार्च में खरीद अचानक करीब 10 गुना तक बढ़ गई और 21 लाख टन से ज्यादा चावल खरीदा गया, जबकि पिछले साल इसी समय करीब 2 लाख टन ही खरीद हुई थी. जानकारों का कहना है कि कई बार राज्यों से चावल का ट्रांसफर देर से होता है, जिससे आंकड़े एक साथ दिखते हैं. यही वजह रही कि मार्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली.

सरकार ने लक्ष्य भी बढ़ाया

सरकार ने इस बार चावल खरीद का लक्ष्य भी बढ़ा दिया है. पहले 2025-26 के लिए यह लक्ष्य करीब 477 लाख टन था, जिसे अब बढ़ाकर 487 लाख टन कर दिया गया है. इससे साफ है कि सरकार अपने भंडार को मजबूत करना चाहती है. पिछले साल यानी 2024-25 में खरीफ और रबी दोनों मिलाकर कुल 545.22 लाख टन चावल खरीदा गया था, जो एक बड़ा आंकड़ा था.

कहां खत्म हुई खरीद, कहां जारी है

देश के कई राज्यों में खरीफ सीजन की चावल खरीद 31 मार्च तक पूरी हो चुकी है. आंध्र प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अब खरीद बंद हो गई है. लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी खरीद जारी है. ओडिशा में 7 अप्रैल तक, पश्चिम बंगाल में 30 अप्रैल तक, असम में 30 जून तक और त्रिपुरा में 31 मई तक खरीद का काम चलता रहेगा.

अब रबी सीजन पर नजर

सरकार अब रबी सीजन की तैयारी में जुट गई है. अप्रैल से सितंबर के बीच 79.57 लाख टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें सबसे ज्यादा 35 लाख टन खरीद तेलंगाना से करने की योजना है. इसके अलावा तमिलनाडु से 14 लाख टन, ओडिशा से 11 लाख टन और आंध्र प्रदेश से 10 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया गया है.

अलग-अलग राज्यों का प्रदर्शन

अगर राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश ने इस बार अच्छा प्रदर्शन किया है. यहां 41.75 लाख टन चावल खरीदा गया, जो पिछले साल से 8 प्रतिशत ज्यादा है.

मध्य प्रदेश में 34.67 लाख टन खरीद हुई, जो 18.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. उत्तराखंड में भी 11.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई.

ओडिशा ने तो इस बार शानदार प्रदर्शन किया है. यहां 52.07 लाख टन चावल खरीदा गया, जो पिछले साल से करीब 29.8 प्रतिशत ज्यादा है. छत्तीसगढ़ में भी 73 लाख टन खरीद हुई, जो 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.

हालांकि कुछ राज्यों में गिरावट भी देखने को मिली. पंजाब, जो आमतौर पर सबसे ज्यादा चावल देता है, वहां इस बार खरीद 104.86 लाख टन रही, जो पिछले साल से 9.7 प्रतिशत कम है. हरियाणा में भी लगभग स्थिर स्थिति रही.

उत्पादन में भी हल्की बढ़त

कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 के खरीफ सीजन में चावल का उत्पादन 123.93 मिलियन टन रहने की संभावना है. यह पिछले साल के 122.77 मिलियन टन से करीब 1 प्रतिशत ज्यादा है.

किसानों के लिए क्या मतलब?

इस पूरे आंकड़े को अगर सरल भाषा में समझें, तो इसका मतलब है कि सरकार किसानों से ज्यादा चावल खरीद रही है. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होती है और उन्हें MSP पर सही कीमत मिलती है.

हालांकि, राज्यों के बीच अंतर यह भी दिखाता है कि हर जगह स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ जगहों पर खरीद बेहतर रही, तो कुछ जगहों पर कमी भी दिखी.

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