Mustard Price: राजस्थान की मंडियों में इस समय सरसों के दाम किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं. करीब एक दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची कीमतों ने किसानों के सामने नया सवाल खड़ा कर दिया है-क्या अभी फसल बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जाए या कुछ दिन इंतजार कर और ज्यादा भाव मिलने की उम्मीद की जाए? अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और खाद्य तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर अब सीधे राजस्थान की मंडियों में दिखाई दे रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि मौजूदा हालात बने रहे तो सरसों के दाम में अभी और तेजी देखने को मिल सकती है.
वैश्विक तनाव का असर, मंडियों में बढ़ी सरसों की कीमत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक खाद्य तेल बाजार को प्रभावित किया है. इसका सीधा असर भारत के तेलहन बाजार पर देखने को मिल रहा है. राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता मंडी सहित कई मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है. यह कीमतें पिछले लगभग 10 वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर मानी जा रही हैं. खाद्य तेलों की संभावित कमी की आशंका के चलते तेल मिलों ने खरीद बढ़ा दी है, जिससे बाजार में तेजी बनी हुई है.
व्यापारियों का दावा, 8,500 रुपये से ऊपर जा सकते हैं भाव
मंडी से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, मौजूदा तेजी केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसकी प्रमुख वजह हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और समुद्री आपूर्ति प्रभावित रहती है तो सरसों के भाव 8,500 रुपये प्रति क्विंटल या उससे अधिक तक पहुंच सकते हैं. वहीं, यदि हालात सामान्य हो जाते हैं तो बाजार में कुछ नरमी भी देखने को मिल सकती है.
कोई बेच रहा तो कोई कर रहा इंतजार
मेड़ता मंडी में इन दिनों प्रतिदिन लगभग 700 से 800 कट्टे सरसों की आवक हो रही है. जिन किसानों ने पहले से सरसों का स्टॉक कर रखा था, वे ऊंचे भाव का लाभ लेने के लिए धीरे-धीरे मंडियों में पहुंच रहे हैं. वहीं कई किसान अभी भी बेहतर कीमत की उम्मीद में अपनी उपज रोककर बैठे हैं. उनका मानना है कि यदि बाजार की मौजूदा स्थिति बनी रही तो सरसों 10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक भी पहुंच सकती है. ऐसे में किसान बाजार के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
विशेषज्ञों की सलाह, बाजार पर रखें नजर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कृषि एवं बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सरसों का बाजार केवल घरेलू उत्पादन और मांग से प्रभावित नहीं है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी इसकी दिशा तय कर रहे हैं. इसलिए किसानों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार की गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर रखनी चाहिए. आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति के आधार पर सरसों के दाम में और तेजी या फिर कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है. ऐसे में सोच-समझकर लिया गया फैसला किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकता है.