कश्मीर में इस साल अखरोट की फसल अच्छी हुई है. पेड़ों पर अखरोट की अच्छी पैदावार हुई और किसानों ने इसकी तुड़ाई भी शुरू कर दी है. इसके बावजूद किसानों को इस बार ज्यादा कमाई की उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आ रही है. किसानों और व्यापारियों का कहना है कि सस्ते विदेशी अखरोट, पुराने पेड़ों से कम उत्पादन और नए पेड़ लगाने में आ रही दिक्कत इसकी बड़ी वजह हैं.
सस्ते विदेशी अखरोट से स्थानीय किसानों को नुकसान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुपवाड़ा के किसानों का कहना है कि इस साल फसल अच्छी है, लेकिन बाजार में किसानों को सही दाम नहीं मिल रहे हैं. इसकी बड़ी वजह विदेशों से आने वाला सस्ता अखरोट है. चीन, चिली और कैलिफोर्निया जैसे देशों से अखरोट भारत के बाजार में पहुंच रहा है. कश्मीर ड्राई फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष हाजी बहादुर खान के मुताबिक, सस्ते विदेशी अखरोट के कारण स्थानीय अखरोट की कीमत पर दबाव बढ़ रहा है. उन्होंने नेपाल के रास्ते अखरोट की तस्करी होने की बात भी कही है. ऐसे में कश्मीर के किसानों के लिए अच्छी फसल के बावजूद अच्छा दाम मिलना मुश्किल हो रहा है.
भारत के अखरोट उत्पादन में कश्मीर सबसे आगे
अखरोट उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की बड़ी हिस्सेदारी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पैदा होने वाले कुल अखरोट का 95 फीसदी से ज्यादा हिस्सा जम्मू-कश्मीर से आता है. यहां करीब 89 हजार हेक्टेयर जमीन पर अखरोट की खेती होती है और हर साल लगभग 3.5 लाख टन अखरोट पैदा होता है. कश्मीर में अनंतनाग सबसे बड़े अखरोट उत्पादक जिलों में शामिल है. यहां करीब 62 हजार टन अखरोट का उत्पादन होता है. इसके बाद पुलवामा और कुपवाड़ा का नंबर आता है. यानी देश के अखरोट बाजार में कश्मीर के किसानों की भूमिका बहुत बड़ी है.
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पुराने पेड़ों से कम पैदावार, नई किस्म लगाने में परेशानी
कश्मीर के कई बागों में अखरोट के पेड़ काफी पुराने हो चुके हैं. ये पेड़ बहुत ज्यादा जगह लेते हैं, लेकिन इनसे उतनी पैदावार नहीं मिलती. इससे किसानों की कमाई कम हो जाती है. खासकर छोटे किसानों के लिए यह बड़ी परेशानी है. किसानों का कहना है कि अगर पुराने पेड़ों की जगह हाई-डेंसिटी यानी कम जगह में ज्यादा पेड़ लगाने वाली नई किस्में लगाई जाएं तो उत्पादन बढ़ सकता है. इन नई किस्मों में करीब 4 से 5 साल में फल आना शुरू हो सकता है, जबकि पारंपरिक अखरोट के पेड़ों को फल देने में 10 साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है.
पेड़ काटने पर रोक बनी किसानों की बड़ी समस्या
किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी अखरोट के पुराने पेड़ों को हटाने की है. कश्मीर में अखरोट के पेड़ों को जम्मू-कश्मीर निर्दिष्ट वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1969 के तहत सुरक्षा मिली हुई है. स्वस्थ और फल देने वाले पेड़ों को काटने के लिए सरकारी अनुमति जरूरी है. किसानों की मांग है कि पुराने और कम उत्पादन देने वाले पेड़ों को हटाकर नई किस्म लगाने की अनुमति दी जाए. हालांकि, सरकार फिलहाल कानून में ढील देने के पक्ष में नहीं है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा है कि अखरोट के पेड़ों को बचाने के लिए यह कानून बनाया गया है. सरकार बदलाव पर तभी विचार कर सकती है, जब पुराने पेड़ हटाने के साथ नए अखरोट के पेड़ लगाना भी जरूरी किया जाए.