पंजाब में कमजोर मॉनसून के बीच धान की फसल की सिंचाई के लिए किसान ट्यूबवेल पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं. इससे राज्य में बिजली की मांग अचानक काफी बढ़ गई है. बुधवार को बिजली की अधिकतम मांग पिछले साल के मुकाबले करीब 140 फीसदी ज्यादा रही. 2 सितंबर को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 16,343 मेगावाट पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 6,830 मेगावाट थी. यानी एक साल में मांग में 139.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इससे एक दिन पहले 1 सितंबर को भी बिजली की मांग 15,928 मेगावाट रही थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने 2,709.45 लाख यूनिट बिजली खरीदी. इसके लिए करीब 119.5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. बिजली की औसत खरीद कीमत 4.41 रुपये प्रति यूनिट रही. राज्य में बिजली की मांग बढ़ने के पीछे धान की सिंचाई के अलावा अपने बिजली संयंत्रों से कम उत्पादन और बिजली विभाग के कर्मचारियों व इंजीनियरों की जारी हड़ताल भी प्रमुख वजह है. वहीं, पहले से सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराने का बोझ भी PSPCL पर है.
कमजोर मॉनसून और तेज गर्मी से बढ़ी बिजली की मांग
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा के मुताबिक, राज्य में इस बार मॉनसून 36 फीसदी कम रहा है. बारिश की कमी के कारण किसान धान की सिंचाई के लिए भूजल और पंप सेट पर ज्यादा निर्भर हैं. धान की फसल में पानी की जरूरत अधिक होती है, इसलिए ट्यूबवेल के इस्तेमाल से बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि कमजोर मॉनसून और लगातार पड़ रही गर्मी के कारण किसानों को धान की सिंचाई के लिए भूजल और पंप सेट पर निर्भर रहना पड़ा. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बिजली की मांग बढ़ना स्वाभाविक है. चीमा ने बताया कि गर्मी का असर अभी भी जारी है.
सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत जारी
वहीं, बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल के कारण राज्य के कई थर्मल पावर प्लांट की यूनिटें काम नहीं कर रही हैं. इससे बिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ है और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को बाजार और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ रही है. चीमा ने कहा कि सरकार प्रदर्शन कर रहे बिजली कर्मचारियों से बातचीत कर रही है और बातचीत जारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्मचारी जल्द काम पर लौट आएंगे.
300 यूनिट मुफ्त बिजली से बढ़ी घरेलू खपत
हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब को अगले दो दिनों तक बाहर से बिजली खरीदनी पड़ सकती है. वहीं, बिजली विभाग के एक इंजीनियर के मुताबिक घरेलू बिजली की बढ़ती खपत भी मांग बढ़ने की एक वजह है. उन्होंने कहा कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के चलते कई ऐसे परिवारों ने भी AC और दूसरे बिजली उपकरण लगाए हैं, जो पहले इनका इस्तेमाल नहीं करते थे. इससे बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है.
उद्योगों पर शुरू हुआ बिजली कटौती का असर
बिजली की कमी का असर अब उद्योगों पर भी दिखने लगा है. बुधवार को PSPCL ने 31.4 लाख यूनिट बिजली की कटौती की. जालंधर, लुधियाना, मोहाली, खन्ना और मंडी गोबिंदगढ़ में कैटेगरी-II और कैटेगरी-III के औद्योगिक उपभोक्ताओं को करीब 3 घंटे 45 मिनट तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. हालांकि, PSPCL की बिजली स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक कैटेगरी-I के औद्योगिक उपभोक्ताओं और प्रमुख शहरों के लिए कोई निर्धारित बिजली कटौती नहीं की गई.