12.94 लाख एकड़ में रिकॉर्ड खेती, फिर भी MSP से कम दाम पर बिक रहा मक्का… सड़कों पर उतरे किसान

Telangana maize farmers crisis: सरकार की ओर से खरीद की तैयारी समय पर नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कत हो रही है. अब तक सिर्फ 1.45 लाख मीट्रिक टन मक्का ही खरीदा गया है, जिसमें करीब 28 हजार किसानों की फसल शामिल है. बाकी किसान अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार कर रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 25 Apr, 2026 | 08:20 AM

Telangana maize farmers crisis: तेलंगाना में इस समय मक्का (मकई) किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. जिस फसल से किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी, वही अब परेशानी का कारण बन गई है. धान किसानों की तरह अब मक्का उगाने वाले किसान भी खरीद में देरी, कम कीमत और खराब व्यवस्था के कारण परेशान हैं. आलम ये है कि कई जिलों में किसान विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए हैं.

रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद परेशानी

तेलंगाना टुडे की खबर के अनुसार, इस साल तेलंगाना में मक्का की बंपर पैदावार हुई है. करीब 12.94 लाख एकड़ में खेती हुई और लगभग 39 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है. इतनी बड़ी पैदावार के बावजूद किसानों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है.

सरकार की ओर से खरीद की तैयारी समय पर नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कत हो रही है. अब तक सिर्फ 1.45 लाख मीट्रिक टन मक्का ही खरीदा गया है, जिसमें करीब 28 हजार किसानों की फसल शामिल है. बाकी किसान अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार कर रहे हैं.

बाजार में गिरते दाम से बढ़ी चिंता

खुले बाजार में मक्का की कीमतें लगातार गिर रही हैं. कई जगह किसानों को 1700 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम दाम मिल रहा है, जबकि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2380 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. ऐसे में किसान मजबूरी में सरकारी खरीद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन वहां भी प्रक्रिया धीमी होने के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं.

खरीद केंद्रों की कमी बनी बड़ी समस्या

किसानों का कहना है कि खरीद केंद्र बहुत कम हैं और कई जगहों पर ये काफी दूर स्थित हैं. इससे किसानों को अपनी फसल ले जाने में ज्यादा खर्च उठाना पड़ रहा है. इसके अलावा, केंद्रों पर सख्त नमी (मॉइश्चर) नियम लागू हैं, जिससे कई बार फसल को रिजेक्ट कर दिया जाता है. वजन करने में देरी के कारण किसानों की फसल कई दिनों तक खुले में पड़ी रहती है, जिससे खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.

बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

हाल ही में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है. कई जगहों पर खेतों और मंडियों में रखी फसल भीग गई, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई. कई किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए कई दिनों तक इंतजार करते रहे, लेकिन इस दौरान नुकसान उठाना पड़ा.

विरोध प्रदर्शन तेज

इन समस्याओं के चलते राज्य के कई हिस्सों में किसानों का गुस्सा बढ़ गया है. पुराने खम्मम, मेडक और वारंगल जिलों में किसानों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. किसान सड़क जाम कर रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और खरीद प्रक्रिया को तेज किया जाए.

बारदाना और मजदूरों की कमी

स्थिति को और खराब बनाने में बारदाना (बोरी) की कमी भी एक बड़ा कारण है. किसानों को मजबूरी में बाजार से महंगे दाम पर बोरी खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनका खर्च बढ़ रहा है. गडवाल मंडी का उदाहरण सामने आया है, जहां करीब 50,000 बोरी मक्का तौल के इंतजार में पड़ी है. यहां मजदूरों और जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण काम धीमा चल रहा है.

किसानों की मांगें

किसान चाहते हैं कि सरकार तुरंत अधिक खरीद केंद्र खोले, नमी के नियमों में कुछ राहत दे और तौल की प्रक्रिया को तेज करे. इसके साथ ही वे यह भी मांग कर रहे हैं कि बारदाना और मजदूरों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि फसल जल्दी खरीदी जा सके और नुकसान से बचा जा सके.

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