UP farmers compensation: उत्तर प्रदेश में इस साल मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कहीं आग लगने की घटनाएं हुईं, तो कहीं ओलावृष्टि और तेज बारिश ने खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया. इन प्राकृतिक आपदाओं से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हुए हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार ने इन हालात को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज कर दी है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन सक्रिय होकर फसल नुकसान का आकलन कर रहा है और जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन्हें आर्थिक सहायता दी जा रही है.
अग्निकांड से प्रभावित किसानों को राहत
इस साल कई जिलों में आग लगने की घटनाओं ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया. बाराबंकी, बलिया, बांदा, महराजगंज, मथुरा, पीलीभीत, रामपुर और सोनभद्र जैसे जिलों में आग की वजह से फसलें जलकर नष्ट हो गईं.
इन घटनाओं में करीब 111.134 हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है. कुल 668 किसान इससे प्रभावित हुए हैं. इनमें से अब तक 51 किसानों को करीब 1.81 लाख रुपये से अधिक की राहत राशि दी जा चुकी है. हालांकि अभी भी कई किसान ऐसे हैं, जिन्हें मदद का इंतजार है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि बाकी किसानों को भी जल्द सहायता दी जाएगी.
ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान
अगर सबसे ज्यादा नुकसान की बात करें, तो ओलावृष्टि ने किसानों को सबसे अधिक प्रभावित किया है. प्रदेश के 13 जिलों मथुरा, जालौन, हरदोई, बुलंदशहर, औरैया, संभल, शाहजहांपुर, आगरा, अलीगढ़, कन्नौज, ललितपुर, सहारनपुर और उन्नाव में बड़े पैमाने पर फसलें खराब हुई हैं. करीब 38,369 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा है. इस आपदा से लगभग 1.07 लाख किसान प्रभावित हुए हैं.
सरकार ने अब तक इनमें से 23,983 किसानों को लगभग 14.92 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है. यह राहत राशि किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है, जिससे वे अपने नुकसान की भरपाई कर सकें.
अतिवृष्टि से भी बढ़ी परेशानी
तेज और लगातार बारिश ने भी कई जिलों में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है. कानपुर देहात, शाहजहांपुर, रामपुर, जालौन, बुलंदशहर, गोंडा, मथुरा, पीलीभीत और सहारनपुर जैसे 9 जिलों में 1,358 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है. यहां कुल 3,920 किसान प्रभावित हुए हैं, जिनमें से अब तक 1,849 किसानों को करीब 1.09 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है.
तेजी से हो रहा नुकसान का आकलन
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रभावित किसान को राहत से वंचित नहीं रखा जाएगा. इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं. जिलों में टीमें बनाकर सर्वे कराया जा रहा है, ताकि सही आंकड़े सामने आएं और उसी के अनुसार मुआवजा दिया जा सके.
किसानों को समय पर राहत देने पर जोर
सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि किसानों को समय पर सहायता मिले, ताकि वे अगली फसल की तैयारी बिना किसी परेशानी के कर सकें. अगर मुआवजा समय पर मिल जाता है, तो किसान फिर से खेती शुरू कर सकते हैं और उन्हें आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा.