खेत तालाब योजना से बदल रही यूपी के किसानों की किस्मत, जल संरक्षण के साथ बढ़ रही आमदनी

Farm Pond Scheme Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए पानी बचाने और अतिरिक्त कमाई का एक महत्वपूर्ण जरिया बन रही है. इस योजना में खेतों में तालाब बनाए जाते हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा किया जाता है, ताकि सूखे के समय भी सिंचाई की जा सके. सरकार इस योजना पर कुल लागत का 50 प्रतिशत यानी लगभग 52,500 रुपये का अनुदान देती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 16 May, 2026 | 07:18 PM

Khet Talab Yojana: उत्तर प्रदेश की ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बहुत लाभकारी योजना है. इसमें खेतों में छोटे तालाब बनाए जाते हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा किया जाता है. इस पानी का उपयोग किसान सिंचाई के लिए करते हैं, जिससे पानी की कमी की समस्या कम होती है. आजकल बारिश अनियमित हो रही है और भूजल स्तर भी घट रहा है, ऐसे में यह योजना किसानों को राहत देती है. यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चल रही है और इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को बचाकर खेती में इस्तेमाल करना है. इससे खेती आसान होती है और किसानों की आय भी बढ़ती है.

बारिश के पानी से सिंचाई की स्थायी व्यवस्था

खेत तालाब योजना में खेतों में छोटे तालाब बनाए जाते हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा किया जाता है. यही पानी सूखे के समय फसलों की सिंचाई के काम आता है. इससे किसानों को पानी की कमी से काफी राहत मिलती है और खेती पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है. आज जब भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, ऐसे में यह तरीका किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहा है.

सरकार दे रही 50 फीसदी तक अनुदान

खेत तालाब योजना के तहत खेत में 22×20×3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है, जिसकी कुल लागत लगभग 1,05,000 रुपये होती है. इसमें सरकार किसानों को करीब 52,500 रुपये तक का अनुदान देती है, यानी कुल खर्च का आधा हिस्सा सरकार वहन करती है. इस मदद से छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी तालाब बनवाना आसान हो गया है और वे इस योजना का लाभ ले पा रहे हैं.

सिंचाई के साथ अतिरिक्त कमाई का अवसर

यह योजना सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बन रही है. तालाबों में किसान मछली पालन, मोती उत्पादन और सिंघाड़े जैसी जलीय फसलों की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें खेती के साथ-साथ अलग से आय भी हो रही है. इसके अलावा सरकार आधुनिक सिंचाई उपकरणों को भी बढ़ावा दे रही है, जिसमें स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान और पंपसेट पर 15,000 रुपये या 50 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है.

पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया

योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है. किसानों का चयन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम हो गई है और लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंच रहा है.

आवेदन प्रक्रिया और जरूरी शर्तें

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है.

  • आवेदन के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है.
  • ऑनलाइन आवेदन के समय 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होती है, जो बाद में वापस कर दी जाती है.
  • बुकिंग के 15 दिनों के भीतर सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाता है.
  • 30 दिनों के अंदर तालाब का निर्माण पूरा करना होता है.
  • अनुदान दो किस्तों में दिया जाता है-पहली किस्त खुदाई के बाद मिलती है.
  • दूसरी किस्त इनलेट और डिस्प्ले बोर्ड लगाने के बाद जारी की जाती है.
    इच्छुक किसान ‘Agri Darshan’ पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.

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