क्या आप जानते हैं? चूहों की वजह से बदला नारियल तेल की बोतल का डिजाइन

इस छोटे से इंजीनियरिंग बदलाव का असर बहुत बड़ा साबित हुआ. दुकानदारों का नुकसान कम हुआ, स्टोरेज आसान हुआ और कंपनियों को खराब माल की शिकायतों से राहत मिली. धीरे-धीरे अन्य ब्रांड्स ने भी यही डिजाइन अपनाया और आज स्थिति यह है कि नारियल तेल की गोल बोतल एक मानक बन चुकी है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 6 Jan, 2026 | 10:55 AM

coconut oil bottle design: आज जब भी हम दुकान पर नारियल तेल खरीदने जाते हैं, तो लगभग हर ब्रांड की बोतल हमें गोल ही नजर आती है. आमतौर पर हम इसे डिजाइन या सुविधा से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक वजह छिपी है. यह वजह फैशन, मार्केटिंग या सुंदरता नहीं, बल्कि चूहे हैं. जी हां, नारियल तेल की गोल बोतल का रिश्ता सीधे-सीधे चूहों की समस्या से जुड़ा हुआ है.

टीन के डिब्बे से प्लास्टिक तक का सफर

शुरुआती दौर में नारियल तेल टीन के डिब्बों में बेचा जाता था. ये डिब्बे मजबूत होते थे और तेल की खुशबू बाहर नहीं आने देते थे. लेकिन जैसे-जैसे प्लास्टिक पैकेजिंग का चलन बढ़ा, कंपनियों ने नारियल तेल को प्लास्टिक डिब्बों में भरना शुरू किया. प्लास्टिक हल्का था, सस्ता था और उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल में भी आसान था. शुरुआत में कंपनियों ने चौकोर यानी स्क्वायर आकार के प्लास्टिक डिब्बे बनाए, क्योंकि इन्हें स्टोर करना और एक के ऊपर एक रखना आसान था.

जब दुकानों में बढ़ा नुकसान

यहीं से असली समस्या शुरू हुई. दुकानों और गोदामों में रखे नारियल तेल के चौकोर प्लास्टिक डिब्बों पर चूहों ने हमला करना शुरू कर दिया. नारियल तेल की तेज खुशबू चूहों को अपनी ओर खींचती थी. चौकोर डिब्बों के किनारे और कोने चूहों के दांतों के लिए आसान निशाना बन जाते थे. वे इन्हें कुतर देते थे, जिससे तेल बह जाता था और दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था. कई दुकानों में सुबह पहुंचने पर दर्जनों बोतलें कटी हुई मिलती थीं.

समाधान की तलाश और गोल बोतल का जन्म

इस समस्या ने कंपनियों को गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया. पैकेजिंग में ऐसा बदलाव जरूरी था, जिससे चूहे डिब्बों को नुकसान न पहुंचा सकें. इंजीनियरों और डिजाइन विशेषज्ञों ने पाया कि गोल सतह को चूहों के लिए पकड़ना और कुतरना मुश्किल होता है. गोल बोतलों में न तो कोने होते हैं और न ही ऐसे किनारे, जहां चूहे अपने दांत आसानी से जमा सकें.

इसके साथ ही बोतलों की प्लास्टिक क्वालिटी और सीलिंग पर भी ध्यान दिया गया, ताकि नारियल तेल की खुशबू बाहर न फैले. जब गोल बोतलों को बाजार में उतारा गया, तो चूहों की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई.

एक छोटे बदलाव ने बदल दी पूरी इंडस्ट्री

इस छोटे से इंजीनियरिंग बदलाव का असर बहुत बड़ा साबित हुआ. दुकानदारों का नुकसान कम हुआ, स्टोरेज आसान हुआ और कंपनियों को खराब माल की शिकायतों से राहत मिली. धीरे-धीरे अन्य ब्रांड्स ने भी यही डिजाइन अपनाया और आज स्थिति यह है कि नारियल तेल की गोल बोतल एक मानक बन चुकी है.

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