खेती करने वाली महिलाओं को न किसान माना जा रहा ना खेतिहर मजदूर, हक के लिए महिलाएं एकजुट हुईं

Women Farmers Demand Land Rights: अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) विकास रस्तोगी ने कहा कि महाराष्ट्र में कृषि में महिलाओं का योगदान काफी हद तक अनदेखा रहता है. महिलाओं को उनका पाने से कोई नहीं सकता है. खेती और इससे जुड़े कार्यों में महिलाओं की बहुत बड़ी भागीदारी है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 25 Jan, 2026 | 11:14 AM

खेतों में दिनरात मेहनत करने वाली महिलाओं को न किसान माना जा रहा है और न खेतिहर मजदूर के रूप में उन्हें पहचान दी जा रही है. इस भेदभाव से खेती करने वाली महिलाओं ने नाराजगी जताई है. महाराष्ट्र की महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें खेती या कृषि के आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रखा जाता है. इसके चलते उन्हें सरकारी योजनाओं, क्रेडिट स्कीम्स समेत अन्य सरकारी लाभ की सीधी और आसान पहुंच हासिल नहीं हो पाती है. महिला किसानों के अधिकारों के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी पेपर पेश किया गया.

महिलाओं ने अपने हक की आवाज बुलंद की

महाराष्ट्र सरकार और एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) के कार्यक्रम में महिला किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की. महिला किसानों ने पहचान और जमीन के अधिकारों की मांग की. महिलाओं औपचारिक पहचान और जमीन के मालिकाना हक की कमी को क्रेडिट, संस्थागत लोन और सरकारी कल्याण योजनाओं तक उनकी पहुंच को सीमित करने वाली बड़ी बाधाओं के रूप में उठाया.

गन्ना की खेती करने वाली महिलाओं ने पहचान संबंधी मुद्दा उठाया

एक बयान में कहा गया है कि कई महिलाओं ने अपने खेती और पहचान संबंधी अनुभव साझा किए. महिलाओं ने बताया कि खेती में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद उन्हें अक्सर आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रखा जाता है. महाराष्ट्र के बीड जिले की द्वारकाताई वाघमारे ने कहा कि मैं गन्ने काटने का काम करती हूं और बारिश पर निर्भर जमीन पर खेती भी करती हूं, लेकिन मुझे न तो किसान के रूप में और न ही खेतिहर मजदूर के रूप में पहचाना जाता है.

महिलाओं के योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता – कृषि सचिव

अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) विकास रस्तोगी ने पीटीआई से कहा कि महाराष्ट्र में कृषि में महिलाओं का योगदान काफी हद तक अनदेखा रहता है. महिलाओं को उनका पाने से कोई नहीं सकता है. खेती और इससे जुड़े कार्यों में महिलाओं की बहुत बड़ी भागीदारी है. इसे कोई नकार नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि राज्य ने स्थायी और जलवायु अनुकूल खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं. महिलाएं इसमें भी आगे हैं.

महिला किसानों के अधिकारों के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी पेपर पेश

विधि लीगल सेंटर और MSSRF की ओर से महिला किसानों के अधिकारों पर एक ड्राफ्ट पॉलिसी पेपर पेश किया गया. यह पेपर किसानों की काम आधारित परिभाषा अपनाने, महिला किसानों को पहचान पत्र जारी करने और अधिकारों तक पहुंच में सुधार के लिए एक बड़े स्तर पर डेटाबेस बनाने की सिफारिश की है. जलवायु परिवर्तन ने महिला किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को और बढ़ा दिया है, जिससे पॉलिसी हस्तक्षेप और संस्थागत समर्थन की जरूरत और भी ज्यादा हो गई है.

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