Assam Farmers Relief: असम में बाढ़ से प्रभावित परिवारों और किसानों के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले किए हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की. बैठक में असम में बाढ़ से हुए नुकसान, किसानों की परेशानी और ग्रामीण इलाकों की स्थिति पर चर्चा हुई. इसके बाद केंद्र ने आवास, खेती, बीज, बागवानी और कृषि मशीनों से जुड़ी कई योजनाओं के लिए बड़ी रकम मंजूर की.
5,000 करोड़ रुपये की आवास मंजूरी
बाढ़ में कई परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत असम के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की आवासीय स्वीकृतियां दी गई हैं. इससे बाढ़ में घर गंवाने या मकान को नुकसान पहुंचने वाले पात्र परिवारों को पक्का घर बनाने में मदद मिल सकेगी. सरकार का फोकस बाढ़ के बाद सिर्फ तत्काल राहत देने पर नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन में लाने पर भी है.
चाय बागान मजदूरों को भी मिलेगा घर
बैठक में असम के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों के घरों का मुद्दा भी उठाया गया. केंद्र सरकार ने साफ किया कि योजना के लिए पात्र चाय बागान श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिलेगा. जिन श्रमिकों को जमीन का पट्टा मिल चुका है, उनके घर बनाने के लिए सर्वे का काम भी तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. इसके बाद पात्र परिवारों को पक्का घर बनाने में मदद मिलेगी. सरकार के इस कदम से चाय बागान श्रमिकों के उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से बेहतर आवास का इंतजार कर रहे हैं.
खेती के लिए 832.70 करोड़ रुपये मंजूर
असम में कृषि को मजबूत करने के लिए केंद्र ने 832.70 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. यह राशि कृषि उन्नति योजना और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY के तहत दी गई है. इस पैसे का इस्तेमाल कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों को जरूरी मदद देने और राज्य में खेती से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जाएगा. बाढ़ के कारण प्रभावित हुई खेती को दोबारा पटरी पर लाने में भी इससे मदद मिल सकती है.
बाढ़ में फसल बर्बाद हुई तो मिलेगा अतिरिक्त बीज
बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में किसानों की फसल खराब हुई है. ऐसे किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने अतिरिक्त बीज और जरूरी खेती से जुड़ी सहायता देने की बात कही है. बाढ़ का पानी कम होने के बाद किसान इन बीजों की मदद से दोबारा खेती शुरू कर सकेंगे. खासकर उन किसानों के लिए यह मदद काफी जरूरी होगी, जिन्हें अगली फसल की तैयारी के लिए नए बीज की जरूरत है. इससे किसानों को बाढ़ के बाद खेती फिर से शुरू करने में मदद मिल सकेगी.
सब्जी और बागवानी खेती पर भी जोर
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में खेती को फिर से पटरी पर लाने के लिए बागवानी को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के तहत 96.87 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत सब्जियों और दूसरी बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा. साथ ही, किसानों को बाढ़ के बाद दोबारा उत्पादन शुरू करने के लिए जरूरी मदद भी दी जाएगी. इससे प्रभावित किसानों को खेती फिर से शुरू करने में सहूलियत मिल सकती है.
आधुनिक कृषि मशीनों के लिए 33.36 करोड़ रुपये
खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए असम को 33.36 करोड़ रुपये की शुरुआती मंजूरी भी दी गई है. इससे किसानों तक आधुनिक कृषि उपकरण पहुंचाने में मदद मिलेगी. कृषि मशीनों के इस्तेमाल से किसानों की मेहनत और समय दोनों बच सकते हैं. साथ ही खेती का काम ज्यादा तेजी से पूरा करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
केंद्र ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया
बैठक के बाद केंद्र की ओर से कहा गया कि बाढ़ प्रभावित असम के लोगों की मदद में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी. आवास से लेकर खेती और कृषि मशीनों तक कई क्षेत्रों में सहायता देने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम है. इन मंजूरियों से बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण परिवारों और किसानों को आने वाले समय में राहत मिलने की उम्मीद है. खास तौर पर घरों का पुनर्निर्माण, बीज की उपलब्धता, सब्जी की खेती और आधुनिक कृषि उपकरणों की मदद से असम के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत करने में मदद मिल सकती है.