भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. इस दौरान देश की GDP ग्रोथ बढ़कर 7.8 फीसदी हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में संशोधित 6.9 फीसदी थी. पश्चिम एशिया में तनाव, महंगी ऊर्जा और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज रही. पहली तिमाही में देश की आर्थिक ग्रोथ को मैन्युफैक्चरिंग और निवेश से बड़ा सहारा मिला. इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 9.2 फीसदी बढ़ा, जबकि निवेश मांग में 11.9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. कृषि और उससे जुड़े सेक्टर में भी 3.6 फीसदी की वृद्धि हुई. बिजली और यूटिलिटी सेवाओं में 8.9 फीसदी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. हालांकि, माइनिंग सेक्टर में 2.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सुधारों को बताया वजह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने GDP के मजबूत आंकड़ों का श्रेय देश की जनता और उनकी मेहनत को दिया. उन्होंने कहा कि NDA सरकार की ओर से किए गए आर्थिक सुधारों और बेहतर आर्थिक प्रबंधन का असर अब दिख रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार सभी लोगों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने के लिए आगे भी काम करती रहेगी. पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7 फीसदी के RBI अनुमान से ज्यादा रही, लेकिन यह पिछली तिमाही की संशोधित 8.6 फीसदी ग्रोथ से कम है.
देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) पर भी दिखा. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में रियल GVA 8.2 फीसदी बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, नॉमिनल GDP 10.3 फीसदी बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. रियल GDP में महंगाई के असर को हटाकर आर्थिक उत्पादन को मापा जाता है, जबकि नॉमिनल GDP की गणना मौजूदा कीमतों के आधार पर होती है.
GDP के आंकड़ों का नया अपडेट जारी, पुराने आंकड़ों में हुआ संशोधन
सरकार ने सोमवार को नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स (NAS) के तहत GDP के अपडेटेड आंकड़े जारी किए. इसमें वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के सालाना आंकड़ों को संशोधित किया गया है. इन आंकड़ों में 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नए प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI), बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स और अलग-अलग सरकारी स्रोतों से मिले नए आंकड़ों को शामिल किया गया है. इसके अलावा वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही से 2025-26 की चौथी तिमाही तक के तिमाही GDP आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है. वित्त वर्ष 2025-26 के GDP के शुरुआती अनुमान भी नए आंकड़ों और संशोधित इंडेक्स के आधार पर जारी किए गए हैं.
मैन्युफैक्चरिंग GDP की गणना का तरीका बदला
नई नेशनल अकाउंट्स सीरीज में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आंकड़ों की गणना के लिए डबल-डिफ्लेशन तरीका अपनाया गया है. इसमें उत्पादन और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इनपुट की कीमतों को अलग-अलग प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स के जरिए समायोजित किया जाता है. सरकार के मुताबिक, इससे मैन्युफैक्चरिंग की वास्तविक वैल्यू एडेड को ज्यादा बेहतर तरीके से मापा जा सकेगा. MoSPI ने कहा कि नए आंकड़ों में आगे भी बदलाव हो सकता है. नए डेटा और अलग-अलग स्रोत एजेंसियों से मिलने वाली संशोधित जानकारी के आधार पर आंकड़ों को अपडेट किया जाएगा. वित्त वर्ष 2026-27 की जुलाई-सितंबर तिमाही के GDP आंकड़े 30 नवंबर 2026 को जारी किए जाएंगे.