बाड़मेर-जैसलमेर में बेमौसम बारिश से भारी तबाही, जीरा-इसबगोल की फसलें चौपट, किसानों पर कर्ज का बढ़ा बोझ

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे बाखासर, सेडवा और चौहटन में भी हालात काफी खराब हैं. यहां के किसानों का कहना है कि जीरे की फसल पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है. कई जगह तेज हवाओं ने फसल को जमीन पर गिरा दिया, जबकि बारिश ने उसकी गुणवत्ता भी खराब कर दी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Mar, 2026 | 09:52 AM

Rajasthan crop damage: राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. बुधवार देर रात आई तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. आधी रात के बाद शुरू हुआ यह मौसम का कहर करीब सुबह 3 बजे तक जारी रहा, जिससे पूरे इलाके में तबाही जैसे हालात बन गए.

यह बारिश ऐसे समय पर हुई, जब रबी फसलें कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थीं. ऐसे में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि खड़ी फसल के साथ-साथ कटाई के बाद खेतों में रखी उपज भी भीगकर खराब हो गई.

कई इलाकों में फसलों को भारी नुकसान

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, जैसलमेर जिले के रामगढ़, कीटा, डाबला और फतेहगढ़ जैसे इलाकों में किसानों ने बड़े पैमाने पर नुकसान की बात कही है. तेज हवाओं और बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को गिरा दिया और कई जगह पूरी फसल नष्ट हो गई.

खास तौर पर जीरा और इसबगोल (प्सिलियम हस्क) की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. नमी बढ़ने के कारण जीरे के दानों के काले पड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे बाजार में इसकी कीमत गिरने की आशंका है. वहीं इसबगोल की फसल में दाने झड़ने की वजह से लगभग पूरी फसल बर्बाद हो गई.

बाड़मेर के सीमावर्ती इलाकों में भी असर

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे बाखासर, सेडवा और चौहटन में भी हालात काफी खराब हैं. यहां के किसानों का कहना है कि जीरे की फसल पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है. कई जगह तेज हवाओं ने फसल को जमीन पर गिरा दिया, जबकि बारिश ने उसकी गुणवत्ता भी खराब कर दी.

किसानों के अनुसार, यह नुकसान सिर्फ खड़ी फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि जो उपज कटकर खेतों में रखी थी, वह भी पूरी तरह भीग गई है. इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.

कर्ज में डूबे किसानों की बढ़ी चिंता

इस नुकसान ने उन किसानों की चिंता और बढ़ा दी है, जिन्होंने फसल तैयार करने के लिए कर्ज लिया था. कई किसानों ने बताया कि उन्होंने उम्मीद के साथ खेती में निवेश किया था, लेकिन अचानक आई इस बारिश ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया. अब किसानों को यह डर सता रहा है कि वे कर्ज कैसे चुकाएंगे और अगली फसल के लिए संसाधन कहां से लाएंगे. इसलिए उन्होंने सरकार से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है.

पश्चिमी विक्षोभ बना वजह

मौसम विभाग के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पश्चिमी विक्षोभ का असर है, जिसने राजस्थान के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल दिया. इसी वजह से अचानक तेज हवाएं, बारिश और धूल भरी आंधी देखने को मिली. मौसम विभाग ने आगे भी कुछ क्षेत्रों में मौसम के अस्थिर बने रहने की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है.

जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज

बाड़मेर के सांसद उम्मेदा राम बेनीवाल ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री भजन लाल से तुरंत कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द गिरदावरी कराई जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके.

इसके साथ ही उन्होंने फसल बीमा से जुड़े मामलों में गड़बड़ियों की जांच करने और किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि लाखों रुपये का नुकसान झेल चुके किसान पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं और उन्हें तत्काल मदद की जरूरत है.

किसानों के सामने बड़ी चुनौती

इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बदलते मौसम के कारण खेती करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि अब आम होती जा रही है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है. फिलहाल किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी परेशानी को समझेगी और जल्द राहत पहुंचाएगी, ताकि वे दोबारा खेती के लिए तैयार हो सकें.

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