सावधान! पराली जलाने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू, अब हर खेत की होगी मैपिंग 

हरियाणा सरकार ने पराली जलाने पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति लागू की है. अब तक फतेहाबाद, जींद और कुरुक्षेत्र में तीन मामले दर्ज हुए हैं. 5.65 लाख किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. सरकार मशीनों पर सब्सिडी और CHC के जरिए किसानों को सहायता भी दे रही है.

नोएडा | Updated On: 30 Sep, 2025 | 02:29 PM

Haryana News: हरियाणा सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने क लिए कड़ा कदम उठाया है.  अब सरकार पराली जलाने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत काम करेगी. यानी अगर कोई पराली जलाते हुए पकड़ा जाता है कि उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि कार्य योजना का 100 फीसदी पालन सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने साफ कहा कि पराली जलाने पर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है. उन्होंने यह भी जोर दिया कि हवा की गुणवत्ता बनाए रखना सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) की सेहत के लिए भी जरूरी है. वहीं, अब हर गांव में हर खेत की मैपिंग होगी, ताकि यह तय किया जा सके कि किस खेत में किस तरीके से पराली प्रबंधन होगा.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का कहना है कि इस सीजन में अब तक फतेहाबाद, जींद और कुरुक्षेत्र से पराली जलाने  के तीन मामले सामने आए हैं. इन मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है और संबंधित किसानों की जमीन रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ भी कर दी गई है.. साथ ही पर्यावरण हानि के लिए जुर्माना (EC चार्ज) भी लगाया गया है.

इतने लाख किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा है कि अब तक 5.65 लाख किसानों ने पराली प्रबंधन  के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिससे कुल 39.33 लाख एकड़ धान का क्षेत्र कवर होता है. सबसे ज्यादा रजिस्टर्ड क्षेत्र वाले टॉप पांच जिले में करनाल (4.69 लाख एकड़), कैथल (4.34 लाख एकड़), सिरसा (3.70 लाख एकड़), फतेहाबाद (3.61 लाख एकड़) और जींद (3.56 लाख एकड़) शामिल हैं.

हर खेत की होगी मैपिंग

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर गांव में हर खेत की मैपिंग  का काम पूरा किया जाए, ताकि यह तय किया जा सके कि किस खेत में किस तरीके से पराली प्रबंधन किया जाएगा. रस्तोगी ने कहा है कि हरियाणा सरकार न सिर्फ पराली प्रबंधन मशीनों की खरीद पर सब्सिडी दे रही है, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए ये मशीनें कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) के जरिए उपलब्ध भी कराई जा रही हैं. उन्होंने जिला प्रशासन से कहा कि मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए, CHC में उनकी उपलब्धता पर नजर रखी जाए और कटाई के पीक सीजन में किसानों को हर संभव मदद दी जाए.

किसानों की भी दी गई नई जिम्मेदारी

वहीं, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की बैठक में कृषि विभाग के पोर्टल और MFMB सिस्टम की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई. ये दोनों सिस्टम किसानों का रजिस्ट्रेशन, मशीनों की बुकिंग, प्रोत्साहन राशि का वितरण और रियल-टाइम डेटा  रिपोर्टिंग जैसे कामों में अहम भूमिका निभा रहे हैं. किसानों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारियों को किसानों के समूह सौंपे गए हैं. रेड और येलो जोन में हर अधिकारी को अधिकतम 50 किसानों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि ग्रीन जोन में यह संख्या 100 किसानों तक रखी गई है. इस व्यवस्था से निगरानी बेहतर होती है.

Published: 30 Sep, 2025 | 02:25 PM

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