पंजाब में सब्सिडी पर मिलने वाली पराली प्रबंधन मशीनों की दोबारा बिक्री में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. ऐसे में पंजाब सरकार ने सब्सिडी पर खरीदी गई पराली प्रबंधन मशीनों की दोबारा बिक्री को लेकर एक नई जांच शुरू की है. ये मशीनें 50 फीसदी सब्सिडी लेकर खरीदी गई थीं, लेकिन कुछ किसानों, किसान समूहों और कस्टम हायरिंग सेंटर्स ने इन्हें तय पांच साल की अवधि से पहले ही बेच दिया. अब सरकार ऐसे लोगों से पूरी सब्सिडी और उस पर ब्याज वसूल करेगी. ये जांच उस समय शुरू की गई है जब केंद्र सरकार की पहले से चल रही जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018-19 से 2021-22 के बीच खरीदी गई करीब 11,200 मशीनों के गायब होने को लेकर पहले से ही जांच चल रही है. इसके बावजूद कुछ किसानों ने दोबारा मशीनें बेचनी शुरू कर दी. पहली जांच में सामने आया था कि करीब 140 करोड़ रुपये के फर्जी बिल लगाकर सब्सिडी का पैसा हड़प लिया गया. इस घोटाले में कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी. पिछले साल 900 से ज्यादा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे.
किसान 1 साल में ही बेच देते हैं मशीन
सरकार की सब्सिडी योजना के तहत किसान जब पराली प्रबंधन मशीनें जैसे हैप्पी सीडर, रोटावेटर आदि खरीदते हैं, तो उन्हें एक घोषणा देनी होती है कि वे इन मशीनों को कम से कम पांच साल तक अपने पास रखेंगे. यह योजना केंद्र सरकार की ‘फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा’ स्कीम के तहत चलाई जाती है. लेकिन कृषि और किसान कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक, कई किसान मशीनें खरीदने के 1-2 साल के भीतर ही बेच रहे हैं. खासकर 2023-24 में खरीदी गई मशीनें अब डीलरों तक पहुंच रही हैं और सोशल मीडिया पर इनके विज्ञापन भी दिए जा रहे हैं.
सब्सिडी की रकम की होगी वसूली
इस पर सख्ती दिखाते हुए कृषि निदेशक जसवंत सिंह ने सभी मुख्य कृषि अधिकारियों को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि वे न्यूज रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स की जांच कर ऐसे मामलों का पता लगाएं, जहां सब्सिडी का गलत इस्तेमाल हुआ है. साथ ही, ऐसे किसानों से पूरी सब्सिडी की रकम वापस वसूलने के आदेश दिए गए हैं.
तुरंत होगी सख्त कार्रवाई
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि उन्होंने सब्सिडी के दुरुपयोग की जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि अब सब्सिडी की राशि दो से तीन किश्तों में दी जाएगी. जिन मशीनों पर सब्सिडी दी जाएगी, उनकी फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक जांच) को नियमित प्रक्रिया बनाया जाएगा. जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी.