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ट्रैक्टर का कूलिंग सिस्टम: कैसे रखता है इंजन को ठंडा और लंबे समय तक ताकतवर?
कूलिंग सिस्टम इंजन की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालकर तापमान को संतुलित रखता है. इससे ट्रैक्टर की ताकत बनी रहती है और वह लंबे समय तक बिना दिक्कत काम करता है. सही तापमान पर चलने वाला इंजन ईंधन भी कम खर्च करता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है.
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ट्रैक्टर की ताकत बढ़ानी है तो फ्यूल टैंक रखें साफ, सही देखभाल से बढ़ेगी इंजन की उम्र
Fuel tank cleaning tips: अगर फ्यूल टैंक में गंदगी, पानी या जंग जमा हो जाए तो फ्यूल फिल्टर जाम हो सकता है और इंजन तक सही मात्रा में डीजल नहीं पहुंच पाता. इससे ट्रैक्टर की पावर कम होती है और बार-बार रिपेयरिंग की जरूरत पड़ सकती है.
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कॉम्पैक्ट या रेगुलर? जानिए आपकी खेती के लिए कौन-सा महिंद्रा ट्रैक्टर रहेगा बेहतर
ट्रैक्टर खरीदना एक बड़ा निवेश होता है. यह फैसला कई सालों तक आपके काम और कमाई को प्रभावित करता है. अगर जरूरत से ज्यादा ताकत वाला ट्रैक्टर खरीद लिया तो ईंधन और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है. वहीं जरूरत से कम क्षमता वाला ट्रैक्टर भारी काम में साथ नहीं देगा.
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खेती में हादसे से बचना है तो ऐसे जोड़ें ट्रैक्टर से कृषि उपकरण, काम होगा तेज और सुरक्षित भी
Tractor implement: जुताई, बुवाई, गुड़ाई, ढुलाई या खेत की सफाई हर काम में ट्रैक्टर और उससे जुड़े कृषि उपकरण अहम भूमिका निभाते हैं. लेकिन कई बार किसान जल्दबाजी में उपकरण जोड़ देते हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है या मशीन की कार्यक्षमता कम हो जाती है.
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कल्टीवेटर VS रोटावेटर: गहरी जुताई से लेकर खरपतवार नियंत्रण तक, जानें किसे चुनना रहेगा बेहतर
किसी भी फसल की अच्छी पैदावार की शुरुआत मिट्टी की सही तैयारी से होती है. अगर खेत अच्छी तरह से जोता गया है, मिट्टी भुरभुरी है और खरपतवार नियंत्रण में है, तो बीज का अंकुरण बेहतर होगा. यही काम कल्टीवेटर और रोटावेटर करते हैं, लेकिन दोनों का तरीका अलग होता है.
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ट्रैक्टर का 3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम कैसे करता है काम? जानिए पूरी तकनीक और फायदे
3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम ट्रैक्टर को बहुउपयोगी बनाता है. एक ही ट्रैक्टर से किसान जुताई, बुवाई, खाद डालना, निराई-गुड़ाई और अन्य काम कर सकते हैं. इससे अलग-अलग मशीनों की जरूरत कम हो जाती है. इस तकनीक से काम तेजी से पूरा होता है. उपकरण बदलना आसान होता है, जिससे समय की बचत होती है.








