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अब हाथ से नहीं, मशीन से होगी गोभी की कटाई, हार्वेस्टर से बदलेगी किसानों की कमाई
गोभी हार्वेस्टर एक आधुनिक कृषि मशीन है, जिसे खासतौर पर गोभी की फसल की कटाई के लिए बनाया गया है. यह मशीन बड़े खेतों में तेजी और सटीकता के साथ काम करती है. आमतौर पर इसे ट्रैक्टर से जोड़ा जाता है और खेत में चलाया जाता है. मशीन के आगे लगे तेज ब्लेड गोभी के सिर को जड़ के पास से काट देते हैं.
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थ्रेशर इस्तेमाल करते वक्त न करें ये गलतियां, वरना एक चूक बन सकती है जिंदगी भर का दर्द
अधिकांश दुर्घटनाएं किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि मानवीय गलती से होती हैं. जल्दबाजी में अकेले फसल डालना, ऊंचे या असंतुलित स्थान पर खड़े होकर काम करना, थकान के बावजूद मशीन चलाते रहना ये सब हादसों की बड़ी वजहें हैं. कई किसान ढीले कपड़े पहनकर थ्रेशर पर काम करने लगते हैं. धोती, गमछा या साड़ी का पल्लू मशीन में फंस जाए, तो गंभीर हादसा हो सकता है.
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Tip Of The Day: खेती से ढुलाई तक छाएगा आपका ट्रैक्टर! कम बजट में खरीदें ये दमदार मॉडल, बढे़गी कमाई, घटेगी मेहनत
Tips For Farmers: आज के समय में ट्रैक्टर किसानों के लिए सिर्फ खेती की मशीन नहीं, बल्कि कमाई का मजबूत जरिया बन चुका है. खेत जोतने से लेकर फसल और सामान ढोने तक, ट्रैक्टर हर काम में मदद करता है. इसी वजह से किसान अब कम बजट में मजबूत, दमदार और अच्छा माइलेज देने वाले ट्रैक्टरों की तलाश कर रहे हैं. 40 से 55 हॉर्सपावर रेंज के ट्रैक्टर खेती और ढुलाई, दोनों के लिए सबसे बेहतर माने जाते हैं, जिससे मेहनत कम और आमदनी ज्यादा होती है.
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अब चारा काटना नहीं बनेगा भारी काम, ट्रैक्टर वाली कुट्टी मशीन करेगी सब आसान
ट्रैक्टर चलित कुट्टी मशीन को खास तौर पर हैवी ड्यूटी काम के लिए बनाया जाता है. इसका ढांचा मजबूत लोहे का होता है, जिससे यह लंबे समय तक खराब हुए बिना काम करती है. इसमें दो, तीन या चार ब्लेड का विकल्प मिलता है, जिसे किसान अपनी जरूरत के अनुसार चुन सकते हैं.
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अब प्याज की बुवाई और कटाई में नहीं लगेगा ज्यादा पैसा, ये मशीन बन रही किसानों की असली ताकत
पहले प्याज की रोपाई और कटाई पूरी तरह मजदूरों पर निर्भर रहती थी. एक एकड़ खेत में प्याज की रोपाई के लिए 20 से 25 मजदूरों की जरूरत पड़ती थी. इसमें समय भी ज्यादा लगता था और खर्च भी. कई बार रोपाई में देरी हो जाती थी, जिससे फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ता था.
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ट्रैक्टर लोन की EMI बनी बोझ? तो इन आसान तरीकों से घटाएं किस्त और बचाएं ब्याज
खेती पूरी तरह मौसम और फसल पर निर्भर होती है. कभी बारिश कम हो जाती है, कभी ज्यादा हो जाती है, तो कभी कीट और रोग फसल खराब कर देते हैं. ऐसे में आय अनिश्चित रहती है और ट्रैक्टर लोन की किस्तें भारी लगने लगती हैं. लेकिन अगर कुछ समझदारी भरे तरीके अपनाए जाएं, तो ट्रैक्टर लोन की किस्त भी कम की जा सकती है.








